बिलासपुर…छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता का स्वरूप कैसा हो, इसे लेकर अब व्यापक परामर्श की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। राज्य शासन की ओर से गठित उच्च स्तरीय समिति इस विषय पर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और अन्य संगठनों के विचार जानेगी। इसके लिए 28 अक्टूबर को बिलासपुर में संभाग स्तरीय समूह चर्चा आयोजित की जाएगी। बैठक में आठ जिलों के प्रतिनिधियों से प्राप्त सुझाव समान नागरिक संहिता के प्रस्तावित प्रारूप को तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।

बैठक दोपहर 12.30 बजे लाल बहादुर शास्त्री स्कूल स्थित देवकी नंदन दीक्षित सभागृह में होगी। इसमें न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति के सदस्य शामिल होंगे। बिलासपुर संभाग के अंतर्गत बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है।

 विभिन्न वर्गों से संवाद पर जोर

इस परामर्श बैठक में राजनीतिक दलों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रमुखों, शिक्षाविदों, प्रबुद्ध नागरिकों तथा निगम, मंडल और आयोगों के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श किया जाएगा। समान नागरिक संहिता जैसे व्यापक कानूनी विषय पर विभिन्न पक्षों के विचार और सुझाव जुटाना इस प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य है। बैठक में प्राप्त सुझाव समिति के अध्ययन और अनुशंसाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।

5 सदस्यीय समिति को प्रारूप की जिम्मेदारी

छत्तीसगढ़ शासन ने 25 जून 2026 की अधिसूचना के जरिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह और एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार तथा सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह सदस्य के रूप में शामिल हैं।

समिति को छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने से संबंधित मौजूदा कानूनी स्थिति का अध्ययन करना है। इसके दायरे में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। समिति इन मुद्दों पर नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव प्राप्त करेगी।

दूसरे राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन

राज्य में प्रस्तावित संहिता का प्रारूप तैयार करने के लिए समिति अन्य राज्यों में प्रचलित समान नागरिक संहिता से जुड़ी व्यवस्थाओं का भी अध्ययन करेगी। विभिन्न पक्षों से प्राप्त सुझावों और कानूनी अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर समिति अपनी रिपोर्ट तैयार कर राज्य शासन को सौंपेगी। रिपोर्ट में आवश्यक विधायी और प्रशासनिक कदमों को लेकर अनुशंसाएं भी शामिल होंगी।

बिलासपुर में प्रस्तावित बैठक इसी व्यापक प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके जरिए समिति को क्षेत्र के विभिन्न वर्गों के विचार जानने और उन्हें अपने अध्ययन में शामिल करने का अवसर मिलेगा। अंतिम प्रारूप और आगे की कार्रवाई समिति की अनुशंसाओं तथा राज्य शासन के निर्णयों पर निर्भर करेगी।