बिलासपुर/छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से चल रही खींचतान अब कड़े अनुशासनात्मक चरण में पहुंच गई है। शासन के स्पष्ट निर्देशों और बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद अपनी मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में कार्यभार ग्रहण न करने वाले शिक्षकों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के कड़े निर्देशों के बाद विभाग ने ऐसे 20 शिक्षकों को चिन्हित किया है जिन्होंने आदेशों की अवहेलना की है। इसी कड़ी में पहले चरण में नौ शिक्षकों को औपचारिक आरोप पत्र (चार्जशीट) जारी कर दिया गया है, जबकि शेष 11 शिक्षकों के खिलाफ भी जल्द ही इसी तरह की कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। विभाग की इस कार्रवाई से उन शिक्षकों में हड़कंप मच गया है जो वर्षों से रसूख या अन्य कारणों से अपने मूल स्कूलों को छोड़कर सुविधाजनक स्थानों पर जमे हुए थे।

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इस पूरी कार्रवाई की पृष्ठभूमि 11 दिसंबर को आयोजित उस समीक्षा बैठक से जुड़ी है, जिसमें स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बिलासपुर जिले में युक्तियुक्तकरण की धीमी गति पर भारी नाराजगी जताई थी।

मंथन सभाकक्ष में हुई उस बैठक का माहौल इतना तनावपूर्ण था कि जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे को मंत्री की कड़ी फटकार झेलनी पड़ी थी, वहीं काम के भारी दबाव के चलते कोटा विकासखंड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र मिश्रा बैठक के दौरान ही बेहोश हो गए थे।

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मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा था कि सरकारी व्यवस्था में मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जो शिक्षक मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में वापस नहीं लौट रहे हैं, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। मंत्री के इसी कड़े रुख के बाद विभाग ने सक्रियता दिखाते हुए जिले के चार विकासखंडों—बिल्हा, मस्तूरी, कोटा और तखतपुर—में गहन जांच की और इन 20 डिफाल्टर शिक्षकों की सूची तैयार की।

प्रशासनिक जांच में पाया गया कि इन शिक्षकों की हठधर्मिता का सीधा असर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ रहा है। जिन स्कूलों में इन शिक्षकों को वापस लौटना था, वहां शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से बिल्हा और मस्तूरी विकासखंड के प्राथमिक स्कूलों में स्थिति काफी चिंताजनक पाई गई।

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इसे सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना और कर्तव्य के प्रति लापरवाही मानते हुए प्रशासन ने अब इन शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा है। यदि इन शिक्षकों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उन्हें निलंबन या सेवा से बर्खास्तगी जैसी कठोर दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में शासन के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे। जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि तय समय सीमा के भीतर ज्वाइन न करने वाले शिक्षकों को अब किसी भी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी। फिलहाल, जिन नौ शिक्षकों को आरोप पत्र जारी किया गया है, उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया गया है