दिल्ली।छत्तीसगढ़ में वर्ष 2017 की पुलिस कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.

सर्वोच्च अदालत ने मामले में राज्य सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से बिलासपुर हाईकोर्ट का पूर्व में आया फैसला यथावत बरकरार रहा है, जिससे प्रदेश के सैकड़ों प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है.

यह मामला वर्ष 2017 में छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग द्वारा निकाली गई 2,259 कांस्टेबल पदों की भर्ती प्रक्रिया से संबंधित है, जिसमें वेटिंग लिस्ट (प्रतीक्षा सूची) के क्रियान्वयन को लेकर विवाद खड़ा हो गया था.

पारस राम ध्रुव एवं अन्य अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में वेटिंग लिस्ट से पद न भरे जाने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी थी. छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाईकोर्ट ने 1 फरवरी 2024 को अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया था कि पुलिस कांस्टेबल सेवा नियम 2007 के नियम 13(2) के तहत प्रोन्नति, सेवानिवृत्ति, कैडर बदलाव या अन्य कारणों से खाली हुए पदों को वैध प्रतीक्षा सूची से ही भरा जाना अनिवार्य है.

हाईकोर्ट के इसी आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में 17 नवंबर 2025 को दिए अपने आदेश में 47 सफल अभ्यर्थियों के पदों को सुरक्षित रखने का निर्देश जारी किया था.

अंतिम सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नौशीना अली, हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से एओआर देवाशीष तिवारी के माध्यम से अधिवक्ता रुचि नागर और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. नटराज ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं. सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने सरकार की याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया.