रामानुजगंज..( पृथ्वी लाल केशरी)…सनावल मुख्य मार्ग पर गरीबों में बांटने के लिए भेजा गया चना सड़ा हुआ सड़क किनारे भारी मात्रा में मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। नीलकंठपुर मोड़ से दक्षिण दिशा में करीब 300 मीटर दूर सड़क किनारे बड़ी मात्रा में चना बिखरा पड़ा मिला। मामला सामने आते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और लोगों ने इसे गरीबों के हक पर सीधा हमला बताया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यही चना उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से गरीब परिवारों तक पहुंचना था, लेकिन वितरण के बजाय सड़क किनारे फेंका हुआ मिला। लोगों ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित तंत्र की लापरवाही या मिलीभगत के कारण गरीबों के हिस्से का राशन बर्बाद किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने कहा कि एक तरफ सरकार गरीबों को मुफ्त राशन देकर राहत देने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर उसी राशन को सड़ने और फेंके जाने के लिए छोड़ दिया गया। लोगों का आरोप है कि चना पहले गोदाम तक पहुंचा, लेकिन समय पर वितरण नहीं हुआ। अनाज खराब होने लगा तो जिम्मेदारों ने अपनी लापरवाही छिपाने के लिए उसे सड़क किनारे फिंकवा दिया।

मामले को लेकर क्षेत्रवासियों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों ने पूछा कि आखिर चना परिवहन के दौरान फेंका गया या उचित मूल्य दुकान तक पहुंचने से पहले ही गरीबों के हिस्से का राशन गायब कर दिया गया। ग्रामीणों ने परिवहनकर्ता, राशन दुकान संचालक और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

लोगों का कहना है कि शासन करोड़ों रुपये खर्च कर गरीबों के लिए राशन भेज रहा है, लेकिन यदि समय पर वितरण नहीं होगा तो जरूरतमंद परिवारों तक उसका लाभ कैसे पहुंचेगा। ग्रामीणों ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि गरीबों के पेट के साथ खिलवाड़ किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

फूड इंस्पेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल

मामले के बाद रामानुजगंज अनु विभाग में पदस्थ फूड इंस्पेक्टर की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। भंडारण से लेकर वितरण तक की पूरी व्यवस्था और स्टॉक मिलान की जिम्मेदारी फूड इंस्पेक्टर पर होती है। इसके बावजूद सड़क किनारे भारी मात्रा में चना मिलना विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उचित मूल्य दुकान संचालकों का भी कहना है कि कई बार समय पर भंडारण नहीं होता और राशन देर से पहुंचता है। दुकान संचालक अक्सर यह कहते नजर आते हैं कि माल ही नहीं पहुंचा तो वितरण कैसे करें। अब सड़क किनारे मिला चना पूरे राशन वितरण तंत्र की पोल खोलता नजर आ रहा है।