बिलासपुर… राजस्व पटवारी संघ, छत्तीसगढ़ की जिला इकाई बिलासपुर ने सोमवार को मुख्य सचिव के नाम कलेक्टर के माध्यम से तीन सूत्रीय नहीं बल्कि विस्तृत सात बिंदुओं वाला ज्ञापन सौंपते हुए पटवारियों की पदोन्नति प्रक्रिया में वर्षों से चली आ रही देरी और वेतन निर्धारण की गंभीर विसंगतियों को दूर करने की मांग उठाई है। संघ का कहना है कि पदोन्नति के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं होने से अनेक पटवारी पूरी सेवा पटवारी पद पर ही बिताकर सेवानिवृत्त हो जाते हैं, जिससे कर्मचारियों का मनोबल और कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।

संघ ने ज्ञापन में मांग की है कि पटवारियों की पदोन्नति के लिए निश्चित समय-सीमा तय की जाए और राजस्व निरीक्षक (आरआई) के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती पूरी तरह बंद कर केवल पटवारियों को पदोन्नति के माध्यम से नियुक्ति दी जाए। साथ ही सभी रिक्त आरआई पद पदोन्नति से भरे जाएं तथा पदोन्नति का स्वरूप इस प्रकार निर्धारित किया जाए कि 50 प्रतिशत पद वरिष्ठता और 50 प्रतिशत विभागीय परीक्षा के आधार पर भरे जाएं। लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने की भी मांग की गई है।

ज्ञापन में वेतन विसंगति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। संघ के अनुसार अलग-अलग भर्ती बैचों के पटवारियों के वेतन निर्धारण में गंभीर असमानता है। उदाहरण देते हुए बताया गया कि वर्ष 2010 बैच के पटवारियों का ग्रेड पे 2200 से 2400 होने पर मूल वेतन 36,200 निर्धारित है, जबकि ग्रेड पे 2200 से सीधे 2800 होने पर मूल वेतन 35,300 तय किया गया। संघ का कहना है कि उच्च ग्रेड मिलने के बाद भी मूल वेतन कम होना वेतन संरचना के मूल सिद्धांतों के विपरीत है और इससे कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

संघ ने चेतावनी दी है कि वेतन विसंगति के कारण कर्मचारियों को आर्थिक क्षति के साथ-साथ कोष एवं लेखा सत्यापन, सेवा अभिलेख, भविष्य की पदोन्नति, पेंशन और अन्य सेवा लाभों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए वेतन निर्धारण का परीक्षण कर उसका शीघ्र और न्यायोचित निराकरण किया जाए।