रामानुजगंज..(पृथ्वी लाल केशरी)..सावन के पहले सोमवार को आस्था पर अव्यवस्था भारी पड़ गई। नगर पालिका के वार्ड 7 स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर और उसके पहुंच मार्ग पर गिट्टी विक्रेताओं के कब्जे ने श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ कर दिया। मंदिर पहुंचने आए कई श्रद्धालु गिट्टी पर फिसलकर गिर पड़े, जबकि महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को मंदिर में प्रवेश और बाहर निकलने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका का अमला मूकदर्शक बना रहा।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन को इस समस्या की जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। सवाल उठ रहे हैं कि यदि धार्मिक स्थलों तक जाने का रास्ता भी अतिक्रमण और अव्यवस्था से मुक्त नहीं कराया जा सकता, तो प्रशासन की सक्रियता आखिर दिखाई कहां देती है? श्रद्धालुओं का कहना है कि सावन में मंदिरों में भीड़ बढ़ना कोई नई बात नहीं है। इसके बावजूद गिट्टी विक्रेताओं ने न तो सामग्री हटाई और न ही प्रशासन ने उन्हें हटाने की जहमत उठाई।

मामला केवल शिव मंदिर तक सीमित नहीं है। रामानुजगंज नगर पालिका क्षेत्र की अधिकांश सड़कों पर गिट्टी, ईंट और रेत का खुलेआम कब्जा है। इससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के बजाय आंखें मूंदे बैठा है। जबकि सड़क सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन लगातार निर्देश जारी करते रहे हैं। सवाल यह है कि आदेश कागजों तक ही सीमित क्यों हैं?

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कुछ कारोबारियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। इसी वजह से अधिकारी कार्रवाई करने से बचते हैं। जनता के बीच यह चर्चा भी है कि कहीं किसी प्रभावशाली जनप्रतिनिधि का फोन न आ जाए, इसलिए नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। यदि यह धारणा सही है तो यह कानून के राज पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्राचीन शिव मंदिर परिसर और शहर की सड़कों से तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था, सड़क सुरक्षा और आम नागरिकों की सुविधा से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि प्रशासन कार्रवाई करता है या फिर सावन भर श्रद्धालुओं को इसी तरह जोखिम उठाकर भगवान के दरबार तक पहुंचना पड़ेगा।