LIVE UPDATE
No news items found.
Madhya Pradesh

जल जीवन मिशन का 25 लाख भुगतान रोकने की धमकी देकर घूस मांग रहे PHE के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर AK शाह रंगेहाथों गिरफ्तार, EOW ने निजी आवास पर मारा छापा

अनूपपुर/रीवा: मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकारी जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की बैक-टू-बैक कार्रवाई के बावजूद रिश्वतखोर अधिकारी और कर्मचारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।

इसी कड़ी में एक और बड़ा मामला अनूपपुर जिले से सामने आया है, जहां लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के प्रभारी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (कार्यपालन यंत्री) को ईओडब्ल्यू रीवा की टीम ने रिश्वत की रकम लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार किया है।

ये खबर भी पढ़ें…
विदिशा में मासूमों का संघर्ष देख भड़के उमंग सिंघार, शिवराज और मोहन यादव से पूछे तीखे सवाल
विदिशा में मासूमों का संघर्ष देख भड़के उमंग सिंघार, शिवराज और मोहन यादव से पूछे तीखे सवाल
मध्यप्रदेश के विदिशा जिले से एक ऐसी विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

आरोपी अधिकारी ने जल जीवन मिशन के तहत किए गए कार्यों का अंतिम भुगतान और सिक्योरिटी डिपॉजिट जारी करने के एवज में मोटी रकम की मांग की थी।

यह पूरी कार्रवाई बाणसागर कॉलोनी, रीवा के रहने वाले ठेकेदार रामाश्रय यादव की लिखित शिकायत पर की गई है। पीड़ित रामाश्रय ने ईओडब्ल्यू (EOW) कार्यालय रीवा में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी कंपनी ‘आरजीए कंस्ट्रक्शन’ को कोरोना काल (वर्ष 2020-2021) के दौरान अनूपपुर जिले में जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाने, घर-घर नल कनेक्शन देने तथा अन्य विकास कार्यों का सरकारी ठेका मिला था।

ये खबर भी पढ़ें…
MP Byelection result- बीजेपी को भारी पड़ा ‘चेहरा बदलो’ दांव, आखिर क्यों नरोत्तम के आंसुओं में बह गई आशुतोष की जीत?
MP Byelection result- बीजेपी को भारी पड़ा ‘चेहरा बदलो’ दांव, आखिर क्यों नरोत्तम के आंसुओं में बह गई आशुतोष की जीत?
MP Byelection result/मध्य प्रदेश की राजनीति के केंद्र कहे जाने वाले दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने सियासी गलियारों में...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

कंपनी द्वारा तय समय सीमा में काम पूरी तरह से मुकम्मल किए जाने के बाद विभाग की ओर से अंतिम भुगतान, सिक्योरिटी डिपॉजिट और एफडीआर (FDR) की राशि जारी होना बाकी था।

पीड़ित ठेकेदार के मुताबिक, उन्हें विभाग से करीब 14 लाख रुपये का अंतिम देयक (फाइनल बिल), 7 लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट और लगभग 4 लाख रुपये की एफडीआर राशि (कुल मिलाकर करीब 25 लाख रुपये) जारी करानी थी।

ये खबर भी पढ़ें…
MP-CG में रिलायंस जियो के ब्रॉडबैंड ग्राहक 21 लाख के पार
MP-CG में रिलायंस जियो के ब्रॉडबैंड ग्राहक 21 लाख के पार
भोपाल-रायपुर।मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ टेलीकॉम सर्किल में रिलायंस जियो ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जियो के ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

जब वह इस वैध राशि को पास कराने के लिए पीएचई के प्रभारी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एके शाह से मिले, तो साहब ने साफ कह दिया कि बिना ₹2 लाख का चढ़ावा चढ़ाए फाइल आगे नहीं बढ़ेगी।

परेशान होकर पीड़ित ने भ्रष्टाचार के आगे घुटने टेकने के बजाय कानून की मदद ली। शिकायत में यह भी बताया गया कि रिश्वतखोर अधिकारी एके शाह दबाव बनाकर ₹1.5 लाख की घूस पहले ही वसूल चुका था और बाकी के पैसों के लिए लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था।

स्मार्ट सिटी स्थित निजी निवास पर जाल बिछाकर दबोचा

ईओडब्ल्यू की टीम ने प्रार्थी से मिली शिकायत का बेहद गोपनीयता के साथ सत्यापन कराया। जांच में मामला सही पाए जाने पर आरोपी अधिकारी को रंगेहाथों दबोचने के लिए एक विशेष रणनीति के तहत जाल बिछाया गया। योजना के अनुसार, शुक्रवार को फरियादी रामाश्रय यादव को केमिकल लगे रिश्वत के 30 हजार रुपये लेकर प्रभारी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एके शाह के पास भेजा गया।

रिश्वतखोर शाह ने चालाकी दिखाते हुए पैसे लेने के लिए ठेकेदार को कार्यालय के बजाय अपने स्मार्ट सिटी स्थित निजी निवास पर बुलाया। जैसे ही पीड़ित ने मकान के भीतर आरोपी एके शाह को घूस के 30 हजार रुपये थमाए, वैसे ही आसपास सादे कपड़ों में तैनात ईओडब्ल्यू की टीम ने दबिश देकर उन्हें रंगेहाथों धर दबोचा।

अधिकारियों ने जब आरोपी के हाथ धुलवाए तो केमिकल के कारण उनका रंग गुलाबी हो गया। ईओडब्ल्यू की टीम ने आरोपी अधिकारी को हिरासत में लेकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस अवैध लेन-देन में विभाग के किसी अन्य कर्मचारी या बिचौलिए की भूमिका तो नहीं थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
close