मध्यप्रदेश के विदिशा जिले से एक ऐसी विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और विकास के दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए भाजपा सरकार और विशेष रूप से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर तीखा हमला बोला है। सिंघार का आरोप है कि शिवराज सिंह चौहान के अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा में, आठवीं कक्षा के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बच्चों को हर रोज मौत से रूबरू होना पड़ता है। यहां स्कूली बच्चों को बेतवा नदी पर बने एक चेक डैम को पार करने के लिए करीब चार-चार फीट की 10 जानलेवा छलांगें लगानी पड़ती हैं। सिंघार ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे मध्यप्रदेश में पढ़ने के लिए बच्चों को अब किताबी ज्ञान से पहले ‘छलांग लगाने’ की कला सीखनी होगी।

कांग्रेस नेता द्वारा साझा किए गए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मासूम बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर नदी के ऊपर बने संकरे और फिसलन भरे चेक डैम पर कूद-कूद कर रास्ता पार कर रहे हैं।

सिंघार ने बताया कि बच्चों के पास स्कूल पहुंचने के लिए केवल दो ही विकल्प हैं—या तो वे अपनी जान हथेली पर रखकर इस चेक डैम को कूदते हुए पार करें, या फिर 12 किलोमीटर का लंबा और थका देने वाला रास्ता तय करें। यह स्थिति उस वीवीआईपी क्षेत्र की है, जिसका प्रतिनिधित्व देश के केंद्रीय मंत्री करते हैं और जो सालों तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि आखिर क्या वजह है कि इतने वर्षों के लंबे शासनकाल के बावजूद बच्चों के लिए एक सुरक्षित सड़क और एक छोटे से पुल की व्यवस्था नहीं की जा सकी?

उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि क्या बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है?

उन्होंने भाजपा सरकार के विकास मॉडल पर निशाना साधते हुए कहा कि भाषणों में विकास के ऊंचे-ऊंचे दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत यह है कि बच्चों की जिंदगी के साथ सरेआम खिलवाड़ हो रहा है। सिंघार ने तल्ख लहजे में कहा कि मध्यप्रदेश को भारी-भरकम विज्ञापनों और करोड़ों के इवेंट्स की जरूरत नहीं है, बल्कि प्रदेश के नौनिहालों को सुरक्षित सड़कें, मजबूत पुल और एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था चाहिए जहां उन्हें स्कूल जाने के लिए जान की बाजी न लगानी पड़े।

यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर बच्चों के जीवन और उनके मौलिक अधिकार से जुड़ा है। विपक्षी दल ने साफ कर दिया है कि जब तक विदिशा के इन स्कूली बच्चों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिल जाता, वे इस मुद्दे को सदन से लेकर सड़क तक उठाते रहेंगे।