MP UCC Bill/भोपाल: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने एक बड़ा और युगांतरकारी कदम उठाया है। राजधानी भोपाल के बाहरी इलाके में स्थित ऐतिहासिक स्थल जगदीशपुर में रविवार को आयोजित कैबिनेट की एक विशेष बैठक में यूसीसी (UCC) के ड्राफ्ट बिल को सर्वसम्मति से आधिकारिक मंजूरी दे दी गई।

MP UCC Bill/मुख्यमंत्री ने ऐलान किया है कि इस अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक को 20 जुलाई से शुरू हो रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के पांच दिवसीय मॉनसून सत्र के दौरान पटल पर रखा जाएगा। उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश देश का ऐसा अगला राज्य बनने की राह पर है, जहां सभी नागरिकों के लिए समान व्यक्तिगत कानून लागू होंगे।

विशेष कैबिनेट बैठक के संपन्न होने के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस फैसले(MP UCC Bill) को महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और लैंगिक समानता की दिशा में मील का पत्थर बताया। मुख्यमंत्री ने पुरजोर शब्दों में साफ किया कि भारतीय संविधान की भावनाओं और स्थानीय संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए मध्य प्रदेश के आदिवासी (अनुसूचित जनजाति) समुदाय को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

सीएम यादव ने ‘राम, रहीम, रविंदर और रॉबिन’ का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून का उद्देश्य किसी वर्ग के साथ भेदभाव करना नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक को एक समान अधिकार और सुरक्षा देना है।

मुस्लिम महिलाओं का मिला बड़ा समर्थन, कुल 404 धाराओं का है पूरा मसौदा —-मुख्यमंत्री ने एक बड़ा दावा करते हुए बताया कि यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी के जन-सुनवाई दौरों के दौरान लगभग 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं और 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने इस कानून के प्रावधानों का खुलकर और लिखित में समर्थन किया है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे वोट बैंक की तुष्टिकरण वाली राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता के इस बड़े संकल्प में सरकार का साथ दें।

उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश (रिटायर्ड जस्टिस) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय विशेषज्ञ समिति द्वारा यह व्यापक रिपोर्ट तैयार की गई है। इस ऐतिहासिक रिपोर्ट में कुल 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं। ड्राफ्ट तैयार करने के दौरान पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा गया और डिजिटल व जमीनी स्तर पर कमेटी को जनता से 9.58 लाख से भी अधिक लिखित सुझाव व प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं, जिनमें से 93.54 प्रतिशत लोग राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के पक्ष में दिखे।

विवाह, उत्तराधिकार और लिव-इन पर लागू होंगे सख्त नियम—– इस नए कानून के लागू होने के बाद मध्य प्रदेश के भीतर विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता (भरण-पोषण), जमीन-जायदाद के उत्तराधिकार, गोद लेने की प्रक्रिया और सरोगेसी जैसे सभी पारिवारिक व व्यक्तिगत मामलों में धर्म और जाति से ऊपर उठकर सभी नागरिकों के लिए एक समान नियम प्रभावी होंगे। कानून के मुख्य प्रावधानों पर नजर डालें तो:

  • विवाह की उम्र और बहुविवाह पर रोक: पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है। इसके साथ ही, किसी भी समुदाय में एक जीवनसाथी के जीवित रहते दूसरी शादी (बहुविवाह) पूरी तरह प्रतिबंधित होगी और तलाक केवल कानूनी अदालती प्रक्रिया के जरिए ही मान्य होगा। निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
  • लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: नए कानून के तहत लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए स्थानीय रजिस्ट्रार के पास एक महीने के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। यदि कोई विवाहित व्यक्ति किसी अन्य महिला के साथ गुपचुप तरीके से लिव-इन में रहता पाया जाता है, तो उसे 5 साल तक की जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है।
  • बच्चों के समान अधिकार: टेस्ट ट्यूब बेबी (ART), लिव-इन रिलेशनशिप या सरोगेसी के माध्यम से पैदा होने वाले सभी बच्चों को कानूनी तौर पर पूरी तरह वैध माना जाएगा और उन्हें माता-पिता की संपत्ति में बेटों के बराबर ही पूर्ण उत्तराधिकार प्राप्त होगा।

विपक्ष पर बरसे मुख्यमंत्री, कांग्रेस ने बनाई दूरी

प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब कमेटी ने सर्वदलीय बैठकें बुलाई थीं, तब भारतीय जनता पार्टी, आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों सहित कई सामाजिक संगठनों ने अपने बहुमूल्य सुझाव पटल पर रखे, लेकिन कांग्रेस हमेशा की तरह हर राष्ट्रीय और सामाजिक सुधार के मुद्दे को केवल हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से देखती आई है, इसलिए वह जानबूझकर इस पूरी विचार-विमर्श प्रक्रिया से दूर रही। दूसरी ओर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार के इस कदम को बेरोजगारी, किसानों की बदहाली और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया है।