फाइल नहीं, समाधान चाहिए—बिलासपुर में जनदर्शन बना जवाबदेही का मंच, गड़बड़ियों पर कड़े निर्देश
जनदर्शन में फूटा जमीनी गुस्सा—आवास घोटाले से जल संकट तक 103 मामलों पर कलेक्टर का सीधा एक्शन

बिलासपुर..साप्ताहिक जनदर्शन इस बार औपचारिकता नहीं रहा। यह मंच बना—सीधे सवालों, शिकायतों और जवाबदेही की मांग का। कलेक्टर संजय अग्रवाल के सामने जब 103 आवेदन पहुंचे, तो उनमें सिर्फ कागज नहीं थे, बल्कि सिस्टम की खामियों की परतें भी खुलती गईं।
आवास में गड़बड़ी—पैसा गया, हकदार रह गया
पचपेड़ी के बिनौरी गांव से आए बुजुर्ग तुलसीराम कुर्रे की शिकायत ने बैठक का रुख बदल दिया। प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृत राशि किसी और खाते में चली गई। मामला सामने आते ही कलेक्टर ने साफ निर्देश दिया—राशि वापस दिलाई जाए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो। यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का संकेत था।
अतिक्रमण पर आदेश, फिर भी कब्जा
बेलतरा के बैमा गांव से पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि मुक्तिधाम की जमीन पर कब्जा हटाने का आदेश कागजों में अटका है। मौके पर स्थिति जस की तस है। कलेक्टर ने एसडीएम को स्पष्ट निर्देश दिए—कार्रवाई जमीन पर दिखनी चाहिए, फाइलों में नहीं।
खनन और जलस्रोत—गांवों का सीधा आरोप
मोछ गांव के लोगों ने सामूहिक शिकायत में कुम्हार तालाब से अवैध मुरूम उत्खनन का मुद्दा उठाया। मशीनें चल रही हैं, जलस्रोत खत्म हो रहे हैं। कलेक्टर ने खनिज विभाग को जांच के साथ कार्रवाई का निर्देश दिया। वहीं रतनपुर के पोंड़ गांव में तालाब को निजी नाम पर दर्ज कर पाटने का मामला भी सामने आया—यहां भी जांच और संरक्षण के आदेश दिए गए।
पेयजल संकट—500 मीटर नीचे पानी, टंकी बंद
बिल्हा के गोढ़ी और पत्थरखान गांवों से आई शिकायतों ने जल संकट की गंभीरता उजागर की। जलस्तर 500 मीटर नीचे पहुंच चुका है, और जल जीवन मिशन की टंकी वर्षों से बंद है। कलेक्टर ने पीएचई विभाग को तत्काल व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।
छोटी शिकायतें, बड़े संकेत
शौचालय निर्माण के लिए सहायता, मजदूरी भुगतान लंबित, गैस कनेक्शन के बाद भी सिलेंडर नहीं—ये मुद्दे भले छोटे दिखें, लेकिन सीधे तौर पर योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करते हैं। हर मामले में संबंधित विभाग को समयबद्ध समाधान के निर्देश दिए गए।
जनदर्शन दिखावे का नहीं, दबाव का मंच
इस जनदर्शन ने एक बात स्पष्ट कर दी—लोग अब सिर्फ सुनवाई नहीं, समाधान चाहते हैं। कलेक्टर ने भी संकेत दिया कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। फाइलों से निकलकर फैसले जमीन पर उतरेंगे, तभी भरोसा बचेगा।





