बिलासपुर… छत्तीसगढ़ में न्याय व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्यभर के न्यायिक अधिकारियों के लिए डिजिटल न्यायिक प्लेटफॉर्म पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा के मार्गदर्शन एवं निर्देशानुसार 19 जुलाई को प्रदेश के सभी जिला एवं सत्र न्यायालयों में पदस्थ न्यायिक अधिकारियों के लिए एक साथ आयोजित हुआ।

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को न्याय श्रुति, ई-साक्ष्य, ई-समन, ई-चालान, क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम तथा इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम जैसे अत्याधुनिक डिजिटल न्यायिक प्लेटफॉर्म के प्रभावी संचालन और उपयोग की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाना और डिजिटल प्रणालियों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना रहा।

प्रशिक्षण में जिला एवं तहसील न्यायालयों, परिवार न्यायालयों तथा प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया। उन्हें नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल साक्ष्य के महत्व और तकनीक आधारित न्यायिक प्रक्रियाओं के व्यावहारिक उपयोग से अवगत कराया गया। साथ ही न्यायालयीन अभिलेखों के डिजिटल प्रबंधन, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से समन की तामील और डिजिटल साक्ष्यों के सुरक्षित उपयोग पर भी विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।

न्यायिक संसाधन व्यक्तियों ने प्रशिक्षण सत्रों में अधिकारियों को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन का व्यावहारिक अभ्यास कराया, ताकि न्यायालयों में तकनीक का प्रभावी और सुचारु उपयोग सुनिश्चित हो सके।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का मानना है कि डिजिटल तकनीकों के व्यापक उपयोग से न्यायालयों की कार्यप्रणाली अधिक सरल, पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बनेगी। इससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत होगा, न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी आएगी और आम नागरिकों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण न्यायिक सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।