बिलासपुर…जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की बिल्हा शाखा से जुड़ी गुमा सेवा सहकारी समिति में लाखों रुपये की कथित वित्तीय हेराफेरी का मामला  सामने आया है । इसके अलावा मामले में अब जांच और जवाबदेही के सवाल भी खड़ा हो गया है। समिति के चेकों में कथित काट-छांट और कूटरचना कर स्वीकृत राशि से अधिक रकम निकालने के आरोप हैं। मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच जिला सहकारी केंद्रीय बैंक प्रबंधन ने जांच के लिए दो सदस्यीय दल गठित करने की जानकारी दी है। प्रबंधन का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ठोस और उचित कार्रवाई की जाएगी।

शिकायत में जिला सहकारी बैंक की बिल्हा शाखा के प्रबंधक लक्ष्मण कौशिक, सुपरवाइजर हितेश सलूजा और तत्कालीन समिति प्रबंधक दिवंगत शरद कुमार कश्यप की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि समिति के चेकों में काट-छांट और कूटरचना कर स्वीकृत राशि से अधिक रकम निकाली गई। इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन मामला सामने आने के बाद भुगतान प्रक्रिया, बैंक के आंतरिक नियंत्रण और अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

गुमा सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष राम कुमार बरगाह की ओर से बिल्हा थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद कार्रवाई की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खासकर यह कि जब मामला पुलिस तक पहुंच चुका है, तब बैंक स्तर पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच किस स्तर पर चल रही है। मामले की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अभिलेखों, मूल चेकों, भुगतान विवरण और स्वीकृति संबंधी दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सीईओ का दावा— निष्पक्ष होगी जांच

मामले में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभात मिश्रा ने कहा कि बैंक ने मामले को गंभीरता से लिया है। प्रकरण न्यायिक प्रक्रिया में भी है। बैंक की ओर से तकनीकी पहलुओं की जांच के लिए दो सदस्यों की टीम गठित की गई है। जांच दल की रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर ठोस और उचित कार्रवाई की जाएगी।

मिश्रा के मुताबिक, किसी को पक्षपातपूर्ण तरीके से संरक्षण नहीं दिया जाएगा। जांच में तकनीकी पहलुओं को भी देखा जाएगा, ताकि लेनदेन की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके। बैंक प्रबंधन के इस रुख के बाद अब निगाहें जांच दल की रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर हैं।

कांग्रेस नेता लक्ष्मीनाथ साहू ने मांगा निलंबन

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी तिफरा के अध्यक्ष लक्ष्मीनाथ साहू ने मामले को उठाते हुए संबंधित अधिकारियों के तत्काल निलंबन और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक दबाव के कारण प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। साहू का कहना है कि जब मामले में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है, तब जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को पद पर बनाए रखने के औचित्य पर भी विचार होना चाहिए।

साहू ने बैंक शाखा प्रबंधक लक्ष्मण कौशिक और सुपरवाइजर हितेश सलूजा को जांच पूरी होने तक निलंबित करने की मांग की है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने, कथित रूप से निकाली गई रकम का पूरा हिसाब सामने लाने और गड़बड़ी प्रमाणित होने पर दोषियों से राशि की वसूली करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों और सहकारी संस्थाओं के धन से जुड़े मामले में केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं, बल्कि समयबद्ध कार्रवाई भी जरूरी है।

चेकों से लेकर भुगतान तक, चूकी व्यवस्था?

मामले में कई सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं। चेकों में कथित काट-छांट कैसे हुई? स्वीकृत राशि से अधिक भुगतान किस प्रक्रिया के तहत हुआ? भुगतान के दौरान बैंक स्तर पर किन अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच की? कथित अतिरिक्त निकासी की कुल रकम कितनी है और उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है? इन सवालों का जवाब मूल चेकों, बैंक अभिलेखों, स्वीकृति दस्तावेजों और संबंधित लेनदेन की तकनीकी जांच से ही मिल सकेगा।

बैंक प्रबंधन ने जांच दल गठित कर कार्रवाई का भरोसा दिया है, वहीं कांग्रेस ने संबंधित अधिकारियों के निलंबन की मांग पर जोर दिया है। यदि जांच में वित्तीय गड़बड़ी प्रमाणित होती है, तो राशि की वसूली और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई भी अहम होगी। फिलहाल असली कसौटी यही है कि जांच कितनी निष्पक्षता और कितनी समयसीमा में पूरी होती है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उठे सवालों का जवाब अब जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई से ही मिलेगा।