IPL 2026- KKR की शर्मनाक शुरुआत: 6 मैच और शून्य जीत, क्या टीम की डूबती नैया बचाने के लिए कप्तानी छोड़ेंगे अजिंक्य रहाणे?
आईपीएल 2026 कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के लिए किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हो रहा है. केकेआर की टीम इस सीजन में अभी तक 6 मैच खेल चुकी है, लेकिन उसे 1 भी जीत नसीब नहीं हुई है. उसने 5 मैचों में हार का सामना किया है और 1 मुकाबला बारिश में धुला है

IPL 2026/इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का सीजन कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के लिए किसी भयावह सपने से कम साबित नहीं हो रहा है। तीन बार की चैंपियन रही यह टीम इस समय अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है। सीजन के 6 मुकाबले बीत जाने के बाद भी केकेआर की जीत का खाता नहीं खुल सका है।
5 करारी हार और एक मैच बारिश में धुलने के बाद टीम अंक तालिका में सबसे निचले पायदान पर संघर्ष कर रही है। मैदान पर टीम की रणनीति से लेकर मैनेजमेंट के फैसलों तक, हर तरफ सवालों की बौछार हो रही है। क्रिकेट गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या टीम को इस संकट से उबारने के लिए कप्तान अजिंक्य रहाणे कोई बड़ा और कड़ा फैसला लेंगे, जैसा साल 2018 में गौतम गंभीर ने दिल्ली के लिए लिया था।
साल 2018 का वह वाकया आज भी आईपीएल इतिहास के सबसे बड़े साहसिक फैसलों में गिना जाता है। तब दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स) की शुरुआत भी मौजूदा केकेआर जैसी ही खराब रही थी और टीम शुरुआती 6 में से 5 मैच हार चुकी थी। उस वक्त कप्तान गौतम गंभीर ने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए बीच सीजन में ही कप्तानी छोड़ने का ऐलान कर दिया था।
गंभीर ने स्वीकार किया था कि वे दबाव नहीं झेल पा रहे हैं और टीम के हित में उन्होंने कमान युवा श्रेयस अय्यर को सौंप दी थी। आज केकेआर के हालात भी ठीक वैसे ही नजर आ रहे हैं। रहाणे की कप्तानी में न केवल टीम का संतुलन बिगड़ा हुआ है, बल्कि मैदान पर उनके फैसलों में भी वह आत्मविश्वास नजर नहीं आ रहा है जो एक चैंपियन टीम के लिए जरूरी है।
अजिंक्य रहाणे के लिए सबसे बड़ी मुसीबत उनकी व्यक्तिगत फॉर्म बनी हुई है।
एक कप्तान के तौर पर जब आप खुद रन नहीं बना पाते, तो खिलाड़ियों को प्रेरित करना मुश्किल हो जाता है। रहाणे ने अब तक खेले 6 मैचों में महज 30.40 की औसत से 152 रन बनाए हैं, जिसमें केवल एक अर्धशतक शामिल है। टीम की जरूरतों को देखते हुए उन्होंने अपनी बैटिंग पोजीशन में भी बदलाव किए, लेकिन कोई भी प्रयोग सफल नहीं रहा।
पिछले सीजन (2025) में भी रहाणे की कप्तानी में टीम का प्रदर्शन निराशाजनक था, जहां 14 मैचों में से टीम केवल 5 जीत हासिल कर पाई थी और प्लेऑफ की रेस से बाहर हो गई थी। लगातार दूसरे साल टीम पर वही खतरा मंडरा रहा है और अब केकेआर के लिए आगे का हर मैच ‘करो या मरो’ की स्थिति वाला बन गया है।
प्रशंसकों और क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच अब जवाबदेही तय करने की मांग जोर पकड़ रही है। क्या केकेआर मैनेजमेंट कोचिंग स्टाफ में बदलाव करेगा या फिर नेतृत्व में परिवर्तन कर टीम में नई ऊर्जा फूंकने की कोशिश होगी? कप्तानी का बोझ छोड़कर क्या रहाणे एक बल्लेबाज के तौर पर खुद को साबित करने का रास्ता चुनेंगे?



