रामानुजगंज ( पृथ्वी लाल  केशरी)… प्रदेश में सरप्लस बिजली उत्पादन और निर्बाध विद्युत आपूर्ति के दावों के बीच रामानुजगंज नगरपालिका क्षेत्र की जमीनी तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। पिछले करीब एक सप्ताह से लगातार बिजली की आंख-मिचौली ने आम लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त कर दी है। घरों से लेकर दुकानों, छोटे उद्योगों, कार्यालयों और न्यायालय तक विद्युत आपूर्ति की अनिश्चितता का असर दिखाई दे रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि समस्या की जानकारी आला अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है।

बिजली कटौती,कामकाज पर सीधा असर

आज के दौर में घरेलू जरूरतों से लेकर व्यापार और कार्यालयीन कामकाज तक अधिकांश गतिविधियां बिजली पर निर्भर हैं। ऐसे में बार-बार बिजली गुल होने और कुछ देर बाद आने की स्थिति ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं घरेलू कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। न्यायालय और सरकारी कार्यालयों में भी विद्युत आपूर्ति बाधित होने से कामकाज पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है।

नगरवासियों का कहना है कि लगातार बिजली कटौती अब महज असुविधा नहीं रह गई है, बल्कि यह व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जब समस्या लगातार बनी हुई है और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी भी है, तो समाधान के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं, यह सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

मेंटेनेंस पर खर्च फिर भी व्यवस्था बेहाल

विद्युत व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए समय-समय पर रखरखाव और मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने की बात सामने आती है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली नहीं मिल पा रही है। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर रखरखाव के नाम पर होने वाला खर्च जमीनी स्तर पर कितना असरदार साबित हो रहा है।

एक तरफ सरकार बेहतर विद्युत व्यवस्था और पर्याप्त बिजली उपलब्धता के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ नगर की जनता लगातार बिजली की आंख-मिचौली से परेशान है। सरकार के दावे और जमीनी हकीकत के बीच यह अंतर विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है।

मूलभूत सुविधा से पहले कंक्रीट निर्माण पर जोर?

नगरवासियों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि निर्वाचित और मनोनीत जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं में सड़क, नाली और कंक्रीट निर्माण जैसे कार्य तो प्रमुखता से दिखाई देते हैं, लेकिन बिजली जैसी बुनियादी सुविधा को लेकर अपेक्षित गंभीरता नजर नहीं आती। लोगों का कहना है कि विकास का मतलब केवल कंक्रीट निर्माण नहीं, बल्कि ऐसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी है, जिनसे आम नागरिक का रोजमर्रा का जीवन सुचारु रूप से चल सके।

जनता को उम्मीद थी कि कैबिनेट मंत्री के क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं को लेकर प्रशासन और विभाग विशेष रूप से गंभीर रहेगा। लेकिन लगातार बिजली कटौती ने इन उम्मीदों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि जब उन्हें पर्याप्त रोशनी तक के लिए परेशान होना पड़े तो बड़े विकास कार्यों के दावों का औचित्य भी सवालों के घेरे में आता है।

कांग्रेस के आंदोलन के बीच बिजली मुद्दा गरमाया

इधर कांग्रेस लगातार विद्युत समस्या और मीटर से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रही है। पिछले करीब एक महीने से कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर पहुंचकर लोगों से आवेदन और फार्म भरवा रहे हैं तथा इन समस्याओं को प्रदेश स्तर तक पहुंचाने का दावा कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोगों की शिकायतों और समस्याओं को एकत्र कर उनकी आवाज मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएगी।

ऐसे समय में नगर की बिगड़ती विद्युत व्यवस्था ने सरकार और विद्युत विभाग के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग आम जनता का सीधा सवाल है कि जब बिजली उत्पादन को लेकर प्रदेश में सरप्लस की स्थिति के दावे किए जा रहे हैं, तो उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली क्यों नहीं मिल रही?

फिलहाल लगातार बिजली कटौती ने व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासनिक तंत्र इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए विद्युत आपूर्ति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाता है या फिर जनता को इसी तरह बिजली की आंख-मिचौली झेलनी पड़ेगी।