विश्रामपुर। (मनीष जायसवाल)कोल इंडिया के करीब 2.25 लाख गैर-कार्यकारी कर्मचारियों के लिए 1 जुलाई 2026 से 12वें वेतन समझौते की अवधि शुरू हो चुकी है, लेकिन अब तक वार्ता समिति JBCCI-XII का गठन नहीं हुआ है। वेतन समझौते की प्रक्रिया में हो रही देरी से नाराज कोयला कर्मचारियों ने सोमवार को एसईसीएल विश्रामपुर क्षेत्र में जोरदार प्रदर्शन किया और कोल इंडिया चेयरमैन के नाम ज्ञापन सौंपकर तत्काल वार्ता समिति गठित करने की मांग की।

AITUC, HMS, CITU और INTUC के संयुक्त मोर्चे के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में श्रमिक संगठनों ने कोल इंडिया प्रबंधन और कोयला मंत्रालय के खिलाफ नाराजगी जताई। कर्मचारियों ने 12वें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते के लिए JBCCI-XII का तत्काल गठन करने के साथ 11वें वेतन समझौते NCWA-XI के अब तक लंबित मुद्दों को भी शीघ्र लागू करने की मांग उठाई।

सभा को संबोधित करते हुए AITUC के क्षेत्रीय सचिव पंकज कुमार गर्ग, HMS के क्षेत्रीय अध्यक्ष रामाशीष पाल, CITU के क्षेत्रीय सचिव सुरेश पटेल और INTUC के क्षेत्रीय सचिव अजीत यादव ने कहा कि NCWA-XI की अवधि 30 जून 2026 को समाप्त हो चुकी है। इसके अगले दिन यानी 1 जुलाई से नए वेतन समझौते की अवधि शुरू हो गई, लेकिन वार्ता समिति के गठन को लेकर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। इससे कर्मचारियों में असंतोष और आक्रोश बढ़ रहा है।

वक्ताओं ने कहा कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में कोयला कर्मचारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उनके वेतन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर JBCCI-XII का गठन कराना चाहिए, ताकि नए वेतन समझौते की वार्ता समय पर शुरू हो सके।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वार्ता समिति के गठन में और देरी की गई तो कोयला कर्मचारी आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र करने के लिए मजबूर होंगे। इसकी जिम्मेदारी कोल इंडिया प्रबंधन और कोयला मंत्रालय की होगी।

प्रदर्शन के दौरान हीरा लाल, सजल मित्रा, आर.के. द्विवेदी, कामदेव सिंह, जया कुमारी, अरविंद सिंह, अप्पा राव और शिवाकांत मिश्रा ने भी सभा को संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र नागपुरे ने किया।

प्रदर्शन के बाद संयुक्त मोर्चे के प्रतिनिधियों ने कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन के नाम एस.के.पी. शिंदे, एसओ (एचआर) एवं सुरक्षा प्रभारी रात्रे को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में JBCCI-XII के गठन में हो रही देरी पर तत्काल कार्रवाई करने तथा NCWA-XI के लंबित मुद्दों का शीघ्र निराकरण करने की मांग की गई।