बिलासपुर: (मनीष जायसवाल) गांधी चौक का गवर्नमेंट मल्टीपरपज हायर सेकंड्री स्कूल अब स्वामी आत्मानंद स्कूल के नाम से जाना जाता है यहां के एक शिक्षक थे मोती चंद राय जो इतिहास के व्याख्याता थे। वे अब अपनी 43 वर्षों की निष्ठापूर्ण सेवा के साथ शिक्षा के क्षेत्र में एक अमिट छाप छोड़ते हुए रिटायर हो गए । इस अवसर पर संस्था की ओर से विदाई समारोह आयोजित किया गया.

इस दौरान उनके स्वागत एवं शुभकामनाएं देने के लिए शिक्षा विभाग के कई साथी शिक्षक उपस्थित रहे जिनमें पी.दासरथी , सहायक संचालक जी.एस.अश्विनी कुमार, अखिलेश मेहता, आनंद पांडेय , संजय शरण, शिरीष पांडेय , संदीप चौपडे, स्मिता चोपड़े, सविता तिवारी गायत्री तिवारी, अलका अग्रवाल, साधना प्रधान, युगल शर्मा राजेंद्र साहू एवं स्कूल की प्राचार्य डॉ.चंदना के अलावा एस.जी.बग्गा प्रमुख रूप से शामिल हुए।

सहायक शिक्षक के रूप 1983 से तारबहार के प्राथमिक स्कूल में सत्रहा सौ रुपए की तनख्वाह में अपना शिक्षिकिय सफर शुरू करने वाले एम सी राय ने गवर्नमेंट मल्टीपरपज हायर सेकंड्री स्कूल में अपनी एक अलग पहचान बनाई ।

उनका यहां के मिडिल स्कूल से हायर सेकेंडरी स्कूल तक का सेवाकाल अनुशासन, समर्पण और विद्वता का अनूठा संगम रहा है। मिडिल स्कूल में उन्होंने सभी विषय पढ़ाए और इतिहास जैसे गहन विषय को उन्होंने अपनी रोचक शिक्षण शैली से जीवंत बना दिया, जिससे छात्र न केवल ज्ञान अर्जित करते थे, बल्कि इतिहास के प्रति गहरी रुचि भी विकसित करते थे।

एम सी राय अपने अनुशासन और कठोरता के लिए जाने जाते थे। उनका कक्षा में प्रवेश होते ही एक शांत और सौम्य माहौल बन जाता था। उनकी ओर से दिया गया गृह कार्य कक्षा में अनिवार्य होता था। उनका यह कड़कपन केवल नियमों का पालन कराने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह छात्रों में नैतिकता, समयबद्धता और जिम्मेदारी का भाव जागृत करने का एक माध्यम था।

वे मानते थे कि अनुशासन ही सफलता की कुंजी है, और इस सिद्धांत को उन्होंने अपने जीवन और शिक्षण में पूरी तरह उतारा। उनकी कक्षा में हर छात्र को अपनी क्षमता का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती थी। उनकी कठोरता के पीछे एक संवेदनशील और मार्गदर्शक गुरु का हृदय छिपा था, जो हमेशा अपने छात्रों के कल्याण के लिए तत्पर रहता था। वे एक ऐसे शिल्पकार थे, जिन्होंने ज्ञान की मिट्टी से भविष्य के सशक्त नागरिक गढ़े है।

श्री राय की कार्यप्रणाली व्यवस्थित और प्रेरणा दायी थी। वे न केवल एक शिक्षक थे, बल्कि एक मार्गदर्शक, सलाहकार और प्रेरक भी थे। उनकी विद्वता और विषय के प्रति गहरी समझ ने उन्हें सहकर्मियों और छात्रों के बीच सम्मान का पात्र बनाया। वे अपने सहयोगियों के लिए भी एक प्रेरणा थे, जो हमेशा समय पर कार्य पूर्ण करने और संस्था के उत्थान के लिए तत्पर रहते थे।

शाला के कार्यों से लेकर बोर्ड परीक्षा के सभी कार्यों तक उनके कार्य दक्षता प्रशासनिक अधिकारी के रूप में दिखाई देती थी। व्याख्याता से प्राचार्य पद पर पदोन्नति अगर सही समय पर हो गई होती तो वह प्राचार्य बनाकर रिटायर होते। उनका व्यक्तित्व सादगी और सिद्धांतों का मिश्रण था, जो उन्हें एक आदर्श शिक्षक बनाता था।

श्री राय अविभाजित मध्य प्रदेश से अब तक 43 स्कूल शिक्षा विभाग में अपनी सेवा दिए इस दौरान प्राथमिक स्कूल से लेकर हायर सेकेंडरी तक उन्होंने हजारों छात्रों को पढ़ाया। वे छात्र आज जब भी उनसे मिलते हैं तो गुरु और शिष्य की जो परंपरा के अनुरूप श्री राय का सम्मान करते रहे है। श्री राय के जीवन की असली कमाई उनके छात्रों का उनके प्रति सम्मान का भाव है। उनका कड़कपन एक नदी की धारा सा था, जो किनारों को तोड़ती हुई भी जीवन को सही दिशा देती है।

व्याख्याता शिक्षक मोती चंद राय की सेवा निवृत्ति के अवसर पर गवर्नमेंट मल्टीपरपज हायर सेकंड्री स्कूल स्वामी आत्मानंद स्कूल बिलासपुर में विदाई समारोह में उनके योगदान को याद किया गया। इस दौरान उन्हें चांदी की राम दरबार मूर्ति, श्री फल, शाल और अभिनंदन पत्र से उनका सम्मान किया गया इस दौरान उनकी गरिमामयी सेवा के बारे में संस्था की प्राचार्य डॉ. चंदना पाल ने उनके व्यक्तित्व और कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। श्री राय का यह विदाई समारोह न केवल उनकी सेवा का सम्मान था, बल्कि उनके अनुशासन, कड़कपन और विद्वता का उत्सव भी था। शिक्षा जगत में उनकी यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बनी रहेगी..।

सूर्य समय पर उदय होकर विश्व को प्रकाश देता है, वैसे ही श्री राय ने अनुशासन के प्रकाश से विद्यार्थियों के जीवन को आलोकित किया है। आज उनके पढ़ाए हुए छात्र देश और प्रदेश में जहां पर भी है जब भी उनके बीच अपने विद्यार्थी जीवन की बातें निकलती है तो वे श्री राय को याद जरूर करते हैं।