gold investment tips-भारतीय परिवारों में सोना और चांदी लंबे समय से निवेश और संपत्ति सुरक्षित रखने के लोकप्रिय साधन रहे हैं। हालांकि, बीते कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि दोनों कीमती धातुओं का रिटर्न एक जैसा नहीं रहा है। कुछ अवधियों में चांदी ने सोने को पीछे छोड़ते हुए शानदार तेजी दिखाई, तो लंबी अवधि के आंकड़ों में सोना मामूली बढ़त बनाने में सफल रहा।

gold investment tips/ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि यदि एक, तीन या पांच साल पहले सोने या चांदी में 1 लाख रुपये लगाए होते, तो आज उनकी कीमत कितनी होती?

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के 999 शुद्धता वाले सोने और चांदी के बेंचमार्क भावों पर आधारित आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है। यदि किसी निवेशक ने एक साल पहले चांदी में 1 लाख रुपये का निवेश किया होता, तो उसकी कीमत बढ़कर करीब 1.18 लाख रुपये हो जाती। वहीं, सोने में लगाया गया 1 लाख रुपये का निवेश लगभग 1.14 लाख रुपये तक पहुंचता। यानी एक साल की अवधि में चांदी ने सोने के मुकाबले बेहतर रिटर्न दिया।

तीन साल के निवेश की बात करें तो चांदी का प्रदर्शन और भी दमदार रहा। इस अवधि में चांदी ने करीब 149.29 प्रतिशत का रिटर्न दिया। इसके हिसाब से तीन साल पहले लगाए गए 1 लाख रुपये की कीमत बढ़कर लगभग 2.49 लाख रुपये हो गई होती। वहीं, सोने ने इसी अवधि में करीब 125.26 प्रतिशत का रिटर्न दिया। यानी सोने में निवेश की गई 1 लाख रुपये की रकम बढ़कर करीब 2.25 लाख रुपये हो जाती।

हालांकि, पांच साल के आंकड़ों में तस्वीर बदल जाती है। इस अवधि में सोने ने चांदी को मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया। पांच साल पहले सोने में लगाए गए 1 लाख रुपये की कीमत बढ़कर करीब 2.88 लाख रुपये हो गई होती। वहीं, चांदी में किया गया समान निवेश लगभग 2.79 लाख रुपये तक पहुंचता। इस तरह एक और तीन साल की अवधि में चांदी आगे रही, जबकि पांच साल के आंकड़ों में सोने ने बढ़त बनाई।gold investment tips

सोने और चांदी की कीमतों में तेजी या गिरावट के पीछे कई वैश्विक और आर्थिक कारक काम करते हैं। डॉलर की चाल, ब्याज दरों में बदलाव, वैश्विक तनाव और निवेशकों की मांग दोनों धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। हालांकि, चांदी की एक खासियत यह है कि इसका इस्तेमाल केवल निवेश के लिए नहीं, बल्कि कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर होता है। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में चांदी की मांग बढ़ने से कई बार इसकी कीमतों में सोने के मुकाबले तेज उछाल देखने को मिलता है।gold investment tips

दूसरी ओर, औद्योगिक मांग पर निर्भरता के कारण चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी अधिक हो सकता है। सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जाता है। आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव के दौर में निवेशकों का रुझान अक्सर सोने की ओर बढ़ता है। वहीं, चांदी में अधिक रिटर्न की संभावना के साथ जोखिम भी ज्यादा रहता है।

निवेश से पहले यह समझना जरूरी है कि ऊपर दिए गए रिटर्न बेंचमार्क कीमतों पर आधारित हैं। वास्तविक निवेश में खरीद और बिक्री की कीमतों के बीच अंतर का असर पड़ सकता है। फिजिकल सोना और चांदी खरीदने पर 3 प्रतिशत जीएसटी, आभूषणों पर मेकिंग चार्ज और बिक्री के समय शुद्धता तथा डीलर मार्जिन जैसे कारक भी अंतिम रिटर्न को प्रभावित करते हैं।gold investment tips

जो निवेशक फिजिकल सोना या चांदी खरीदकर रखने से बचना चाहते हैं, वे गोल्ड ETF और सिल्वर ETF जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं। हालांकि, इनमें निवेश से पहले संबंधित फंड के खर्च, जोखिम और बाजार की स्थितियों को समझना जरूरी है।

कुल मिलाकर, उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि एक और तीन साल की अवधि में चांदी ने बेहतर रिटर्न दिया, जबकि पांच साल के आंकड़ों में सोना आगे रहा। इसलिए केवल पिछले रिटर्न को देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं है। निवेशक को अपनी जोखिम उठाने की क्षमता, निवेश की अवधि और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।