रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के सिर पर आन पड़ी ‘स्पेशल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट’ (TET) की तलवार ने पूरे शिक्षा विभाग में हलचल मचा दी है। वार्षिक परीक्षाओं के ठीक मुहाने पर आई इस परीक्षा और इसके साथ थोपे गए विभागीय कार्यों के विरोध में शालेय शिक्षक संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने दो टूक कहा है कि वर्षों की निष्ठावान सेवा ही शिक्षक की दक्षता का एकमात्र पैमाना है, इसलिए सरकार तत्काल अध्यादेश लाकर इस अनिवार्यता को खत्म करे।

प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे की दो टूक: “वर्षों की सेवा ही दक्षता का पैमाना, सरकार लाए अध्यादेश”

शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने सरकार के इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है।

अनुभव की अनदेखी

संघ का तर्क है कि जो शिक्षक बरसों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं और बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, उनकी योग्यता पर सवालिया निशान लगाना अनुचित है।

अध्यादेश की मांग: संघ ने मांग की है कि राज्य शासन को बिना देर किए एक अध्यादेश लाना चाहिए और सेवारत शिक्षकों को इस पात्रता परीक्षा के दायरे से पूरी तरह बाहर करना चाहिए क्योंकि कर्मचारियों की सेवा की सुरक्षा सरकार की ही जिम्मेदारी है।

महासचिव धर्मेश शर्मा का तीखा सवाल: “सैकड़ों शिक्षकों की है की-बोर्ड से दूरी, कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा क्यों?”

महासचिव धर्मेश शर्मा ने परीक्षा के पैटर्न (CBT – Computer Based Test) पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

डिजिटल दूरी

ग्रामीण और अंदरूनी इलाकों में पदस्थ कई ऐसे वरिष्ठ शिक्षक हैं जिनकी कंप्यूटर और की-बोर्ड से दूरी रही है। ऐसे में अचानक ऑनलाइन परीक्षा थोपे जाने से शिक्षकों में मानसिक तनाव बढ़ गया है।

वैकल्पिक मांग

संघ ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि परीक्षा पूरी तरह से OMR शीट के माध्यम से ऑफलाइन ली जानी चाहिए, और शिक्षकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परीक्षा केंद्र ब्लॉक स्तर पर ही बनाए जाने चाहिए।

प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा का कड़ा वार: “शिक्षक कोई सुपरमैन नहीं, जो एक साथ सब संभाल ले!”

प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने मौजूदा हालात का हवाला देते हुए शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा तंज कसा है।

दोहरा और तिहरा दबाव

इस समय स्कूलों में वार्षिक परीक्षाओं का दौर चल रहा है। इसके साथ ही शिक्षकों पर जनगणना, SIR (समग्र आवास/शिक्षक रिपोर्टिंग) और रोजाना आने वाले दर्जनों ऑनलाइन कामों का भारी बोझ है।

मानसिक प्रताड़ना

इन तमाम गैर-शैक्षणिक और शैक्षणिक जिम्मेदारियों को निभाने के बाद अब शिक्षकों को खुद परीक्षा की तैयारी करने के लिए मजबूर करना सरासर अन्याय है।

ब्लू प्रिंट की मांग

यदि परीक्षा अनिवार्य ही है, तो उसका सिलेबस, अनुकूल ब्लू प्रिंट और आसान प्रश्न-पत्र पहले से जारी किए जाएं ताकि शिक्षकों को मानसिक राहत मिल सके।

शालेय शिक्षक संघ की अन्य प्रमुख मांगें

अध्यादेश लाकर सेवारत शिक्षकों के लिए टेट की बाध्यता खत्म करें : वर्षो की सेवा हो दक्षता का पैमाना

निःशुल्क पाठ्य सामग्री

परीक्षा की तैयारी के लिए शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों को बिना किसी शुल्क के अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाए।

ऑनलाइन प्रशिक्षण

यदि परीक्षा अनिवार्य है, तो विभाग द्वारा शिक्षकों के लिए विशेष और सुलभ ऑनलाइन कोचिंग या प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए।

शालेय शिक्षक संघ ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि समय रहते शिक्षकों की इन व्यावहारिक और न्यायसंगत समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेशभर के शिक्षकों में पनप रहा यह आक्रोश एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

शालेय शिक्षक संघ के प्रांतीय पदाधिकारी चंद्रशेखर तिवारी,सुनील सिंह,विष्णु शर्मा,डॉ सांत्वना ठाकुर,सत्येंद्र सिंह,विवेक शर्मा,गजराज सिंह,राजेश शर्मा,शैलेश सिंह,प्रह्लाद जैन,सन्तोष मिश्रा,सन्तोष शुक्ला,शिवेंद्र चंद्रवंशी,दीपक वेंताल,यादवेंद्र दुबे,सर्वजीत पाठक,मंटू खैरवार,पवन दुबे,नंदकुमार अठभैया, भोजराम पटेल,विनय सिंह,आशुतोष सिंह,भानु डहरिया,रवि मिश्रा,बिजेंद्रनाथ यादव,जितेंद्र गजेंद्र,अजय वर्मा,कृष्णराज पांडेय,घनश्याम पटेल,बुध्दहेश्वर शर्मा,प्रदीप पांडेय,उपेंद्र सिंह,पवन साहू,मनोज पवार,देवव्रत शर्मा, कैलाश रामटेके,अब्दुल आसिफ खान,सरवर हुसैन,कुलदीप सिंह चौहान,नेमीचंद भास्कर,राजेश यादव,अमित सिन्हा, विक्रम राजपूत,सुशील शर्मा,विजय जाटवर, शशि कठोलिया,विजय बेलचंदन, अशोक देशमुख,तिलक सेन,द्वारिका भारद्वाज, खेमन साहू आदि पदाधिकारियो ने सरकार से उपरोक्त मांगो पर जल्द से जल्द निर्णय लेने की मांग की है।