कांकेर (मनीष जायसवाल)। शिक्षाकर्मियों से शिक्षक बनने तक का सफर तय करने वाले कर्मचारियों की पुरानी मांगें एक बार फिर चर्चा में हैं। पुरानी पेंशन में प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना और TET की अनिवार्यता को लेकर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन कांकेर ने अब सांसद के दरवाजे पर दस्तक दी है। गुरुवार को जिला कांकेर के प्रतिनिधिमंडल ने सांसद भोजराज नाग से मुलाकात कर चाय पर चर्चा की और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।

 

बातचीत के दौरान प्रदेश महासचिव हेमेन्द्र साहसी ने बताया कि 2018 में तत्कालीन डॉ. रमन सिंह सरकार ने शिक्षाकर्मियों का संविलियन तो कर दिया, लेकिन पुरानी सेवा की गणना संविलियन की तारीख से शुरू की गई। इससे संविलियन के पहले की गई सालों की नौकरी का हिसाब-किताब पेंशन और दूसरे वित्तीय लाभों में नहीं जुड़ पाया। संगठन की मांग शुरू से ही रही है कि प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना की जाए। उनका कहना है कि जब कर्मचारी ने पहली नियुक्ति से ही स्कूलों में जिम्मेदारी निभाई तो पेंशन के मामले में उस सेवा को नजरअंदाज क्यों किया जाए?

 

एसोसिएशन ने सांसद को बताया कि इस व्यवस्था का खामियाजा उन शिक्षकों को भी भुगतना पड़ रहा है जो कम सेवा अवधि में सेवानिवृत्त हो गए। कई साथियों को NPS से 800 से 1200 रुपए तक मासिक पेंशन मिलने की बात कही गई। संगठन का कहना है कि इतने लंबे सेवाकाल के बाद बुढ़ापे में इतनी कम रकम मिलना किसी के लिए भी बड़ी परेशानी है। जब सरकार की दूसरी योजनाओं में इससे ज्यादा आर्थिक सहायता दी जा रही है तो बरसों तक बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक के हिस्से में इतनी कम पेंशन क्यों? संगठन के मुताबिक पुरानी सेवा की गणना का मामला सिर्फ कागजी हिसाब नहीं, यह सेवानिवृत्त कर्मचारियों की जिंदगी और सम्मान से जुड़ा है।

 

दूसरा बड़ा मुद्दा TET का है। संगठन ने कहा कि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर भी TET की अनिवार्यता लागू होने से हजारों अनुभवी शिक्षकों के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है। इनमें ऐसे शिक्षक भी हैं जो 20 से 25 साल से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं और अब 50 वर्ष से अधिक उम्र के हो चुके हैं। भर्ती के समय TET की शर्त नहीं थी, लेकिन अब उसी परीक्षा को अनिवार्य किए जाने से पदोन्नति और सेवा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। संगठन का मानना है कि इतने पुराने शिक्षकों को नए अभ्यर्थियों के साथ एक ही परीक्षा में बैठाना उचित नहीं है। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद इस मामले में समाधान के लिए केंद्र सरकार की भूमिका अहम मानी जा रही है। संगठन की मांग है कि केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर राहत दे अथवा विशेष विभागीय परीक्षा और उम्र व सेवाकाल को ध्यान में रखते हुए छूट का रास्ता निकाले।

 

प्रतिनिधिमंडल ने सांसद भोजराज नाग से कहा कि दोनों मसले लंबे समय से शिक्षकों को परेशान कर रहे हैं। अब जरूरत है कि इन मांगों को शासन के सामने मजबूती से रखा जाए। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का भी आग्रह किया, ताकि बातचीत के जरिए कोई ठोस रास्ता निकल सके। सांसद ने शिक्षकों की बातें गंभीरता से सुनीं और जरूरी पहल कर निराकरण कराने का भरोसा दिलाया।

 

इस मुलाकात में प्रदेश संयोजक वाजिद खान, प्रदेश महासचिव हेमेन्द्र साहसी, जिला महासचिव नितेश उपाध्याय, जिला विधिक सलाहकार वैभव मेश्राम, जिला महामंत्री गुलाब सोन, जिला संयोजक भूषण जैन, जिला पदाधिकारी दीनदयाल ध्रुव, आबिद खान, गोपाल साहू, श्री गंजीर, थानेश साहू, प्रदीप टांडिया और पवन यादव सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।