बिलासपुर। मल्हार के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में छात्राओं को एक्सपायरी सैनिटरी पैड बांटने, मुफ्त वितरण के लिए आई सामग्री बेचने और विद्यार्थियों से दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है।

जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की कार्रवाई से असंतुष्ट छात्राएं मंगलवार को करीब 30 किलोमीटर का सफर तय कर कलेक्टोरेट पहुंचीं। उन्होंने प्राचार्य सहित जिम्मेदार शिक्षकों के निलंबन और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

प्रदर्शन कर रहीं छात्राओं का कहना है कि प्राचार्य और तीन शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में भेजने से मामले में जवाबदेही तय नहीं होती।

उनकी मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

जिला प्रशासन के अधिकारियों ने छात्राओं को समझाने और उनकी मांगों पर चर्चा करने की कोशिश की, लेकिन वे एफआईआर की मांग पर अड़ी रहीं।

मामले में सबसे गंभीर शिकायत छात्राओं को वितरित किए गए सैनिटरी पैड की एक्सपायरी डेट को लेकर है। शिकायत के अनुसार, 7 अगस्त 2026 को छात्राओं को ऐसे सैनिटरी पैड दिए गए, जिन पर सितंबर 2022 की एक्सपायरी डेट अंकित थी। इसके अलावा मुफ्त वितरण के लिए उपलब्ध कराए गए पैड को बेचने का आरोप भी लगाया गया है।

छात्राओं ने इन आरोपों की अलग-अलग बिंदुओं पर जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मामले को केवल विभागीय स्थानांतरण की कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

उन्होंने प्राचार्य और संबंधित शिक्षकों के साथ जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग भी उठाई।

शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने जांच कर प्राचार्य सहित तीन शिक्षकों को वर्तमान विद्यालय से हटाकर दूसरे संस्थानों में कार्य करने के निर्देश जारी किए थे। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच दल ने विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए और 7 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

इसके बाद प्राचार्य वेद प्रकाश शुक्ला, व्याख्याता रश्मि गुप्ता और व्याख्याता संजय दुबे को अन्य विद्यालयों में कार्य करने के आदेश दिए गए।

जारी आदेश के अनुसार, वेद प्रकाश शुक्ला को मस्तूरी विकासखंड के शासकीय हाई स्कूल कुकुर्दीकेरा, रश्मि गुप्ता को शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पचपेड़ी और संजय दुबे को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ओखर में पदस्थ किया गया है।

हालांकि, छात्राओं का कहना है कि संबंधित शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में भेज देना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। वे मामले में आपराधिक जिम्मेदारी तय करने और एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर रही हैं।

जिला प्रशासन की ओर से 10 अक्टूबर को जारी जानकारी के अनुसार, विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार, प्रशासनिक व्यवस्था और शैक्षणिक गतिविधियों में अनियमितताओं की शिकायतें जनप्रतिनिधियों तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से मिली थीं। 1 अक्टूबर को छात्राओं ने कलेक्टर के सामने भी अपनी शिकायतें रखी थीं।

शिकायतों की जांच के लिए 30 सितंबर को तीन सदस्यीय दल गठित किया गया था। जांच दल ने विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज करने के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी।

जिला प्रशासन की जानकारी के मुताबिक, जांच प्रतिवेदन में प्राचार्य वेद प्रकाश शुक्ला और संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध विद्यार्थियों से दुर्व्यवहार, छात्राओं को सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने में अनियमितता, शाला शुल्क के नाम पर प्रति विद्यार्थी 500 रुपये अतिरिक्त वसूली तथा शैक्षणिक दायित्वों के निर्वहन में गंभीर अनियमितताओं से संबंधित आरोपों की पुष्टि होने की बात कही गई।

व्याख्याता रश्मि गुप्ता के संबंध में विद्यार्थियों से दुर्व्यवहार, उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन और अध्यापन कार्य भृत्य से कराने तथा शैक्षणिक दायित्वों में अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। वहीं, व्याख्याता संजय दुबे के संबंध में भी विद्यार्थियों से दुर्व्यवहार और गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने की जानकारी दी गई थी।

जांच दल ने विद्यालय में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के लिए संबंधित शिक्षकों को दूसरे संस्थानों में भेजने की अनुशंसा की थी।

प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद छात्राओं का विरोध जारी है। प्रदर्शन के दौरान उनका जोर इस बात पर रहा कि सैनिटरी पैड वितरण में कथित अनियमितता, मुफ्त सामग्री की बिक्री, अतिरिक्त राशि वसूली और दुर्व्यवहार की शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।