बिलासपुर… बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में बदहाल सड़कों, नाली, बिजली-पानी की समस्याओं और कथित राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय केशरवानी खराब स्वास्थ्य के बावजूद व्हीलचेयर पर सवार होकर आंदोलन में शामिल हुए।

प्रदर्शन के दौरान उन्हें गहरी चोट लगने की भी जानकारी सामने आई। इसके बाद भी वे पूरे समय आंदोलन में डटे रहे और वाटर कैनन की बौछारों का सामना करते रहे।

प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ क्षेत्रवासी शामिल हुए। कार्यकर्ताओं के हाथों में बेलतरा विधायक के खिलाफ नारे लिखी तख्तियां नजर आईं।

प्रदर्शनकारियों ने विधायक के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट का घेराव किया।

कांग्रेस ने सवाल उठाया कि पिछले तीन वर्षों से करोड़ों रुपये के विकास के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं और आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान है।

केशरवानी ने कहा कि नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं को माता के दर्शन के लिए खराब रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। बड़े-बड़े अखबारों में विकास के लिए करोड़ों रुपये आने की खबरें छपती हैं, लेकिन क्षेत्र की हालत देखकर समझ नहीं आता कि विकास आखिर हुआ कहां है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कई जगह सड़क नाली में है या नाली सड़क में, यह समझना मुश्किल हो गया है।

प्रशासनिक आतंकवाद नहीं तो और क्या है?’

किसानों की जमीन के सीमांकन को लेकर विजय केशरवानी ने जिला प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि जब खेतों में फसल खड़ी है, तब ऐसी कार्रवाई करने की जरूरत क्यों पड़ी?

उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक के कथित दबाव में किसानों की खड़ी फसल के बीच सीमांकन कराया गया। केशरवानी ने धनंजय सिंह के परिवार की एक ही स्थान पर स्थित लगभग 45 एकड़ भूमि के सीमांकन, नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और कार्रवाई के समय की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा, “यह प्रशासनिक आतंकवाद नहीं तो और क्या है?” कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि इस कार्रवाई में राजनीतिक दबाव था या नहीं और पंचायत सचिव के स्थानांतरण के पीछे क्या कारण रहे।

बेलतरा को बदलापुर नहीं बनने देंगे

केशरवानी ने कहा कि एक दौर था जब बिलासपुर को ‘उदयपुर’ और फिर ‘खोदापुर’ कहा जाने लगा था। अब बेलतरा की बदहाल सड़कों और बुनियादी समस्याओं को देखकर वही स्थिति दोहराने की आशंका है। उन्होंने दो टूक कहा, “हम बेलतरा को बदलापुर नहीं बनने देंगे।”

उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में विकास के बजाय राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक हस्तक्षेप की शिकायतें बढ़ रही हैं। विधायक का काम जनता की समस्याओं का समाधान कराना है, न कि प्रशासन को अपनी मर्जी से चलाना। केशरवानी ने कहा कि अधिकारी आज यहां हैं, कल दूसरी जगह चले जाएंगे, लेकिन जनता को यहीं रहकर इन समस्याओं से जूझना पड़ेगा। इसलिए प्रशासन को किसी के दबाव में काम करने के बजाय जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभानी चाहिए।

वाटर कैनन के बीच आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान केशरवानी ने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी देते हुए कहा, “याचना नहीं, अब रण होगा; संग्राम महाभीषण होगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बेलतरा के ग्रामीणों और निवासियों की समस्याएं लेकर कलेक्टर के पास पहुंची थी, लेकिन प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने सख्ती दिखाई। उनके मुताबिक, महिलाओं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया और हालात ऐसे बन गए कि लाठीचार्ज की नौबत आ गई। खराब स्वास्थ्य के बावजूद व्हीलचेयर पर आंदोलन में शामिल केशरवानी पूरे समय प्रदर्शनकारियों के बीच मौजूद रहे और वाटर कैनन का सामना करते रहे।

केशरवानी ने कहा कि जनता अपने अधिकारों और विकास के लिए सवाल पूछ रही है। कांग्रेस पीछे हटने वाली नहीं है और क्षेत्र की समस्याओं का समाधान होने तक जनता की आवाज उठाती रहेगी।

प्रशासन से मांगा विकास का हिसाब

कांग्रेस नेताओं ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में सवाल उठाया कि बेलतरा ‘बदलापुर’ क्यों बन गया है और विधायक के कथित दबाव में प्रशासन इतना असहज क्यों है? ज्ञापन में राजनीतिक भेदभाव और प्रतिशोध की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।

इसके अलावा पूरे विधानसभा क्षेत्र की जर्जर सड़कों की मरम्मत, जलभराव से राहत, अवैध रेत-मुरुम उत्खनन और रॉयल्टी की जांच, पंचायत एवं नगर निगम के विकास कार्यों में कथित हस्तक्षेप, गरीब परिवारों के मकानों पर कार्रवाई तथा बिजली बिलों की समस्याओं को उठाया गया। कांग्रेस ने खनिज विभाग, तहसील और संबंधित राजस्व अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग भी की।

ज्ञापन में बिलासपुर कांग्रेस भवन में हुई घटना की निष्पक्ष जांच, शासकीय कर्मचारियों पर कथित राजनीतिक दबाव और स्थानांतरण संबंधी शिकायतों की समीक्षा की मांग भी शामिल है। कांग्रेस ने सभी 17 मांगों पर स्पष्ट समय-सीमा तय करने और जांच एवं कार्रवाई की लिखित जानकारी देने का आग्रह किया।

केशरवानी ने कहा कि बेलतरा की जनता को आश्वासन नहीं, विकास चाहिए; बयान नहीं, काम चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि यदि क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, तो सड़कें बदहाल क्यों हैं और जनता की समस्याओं का समाधान क्यों नहीं हो रहा? कांग्रेस ने चेतावनी दी कि इन सवालों का जवाब और समस्याओं का समाधान नहीं मिला, तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।