बिलासपुर..रक्षाबंधन की रात 28 अगस्त को सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में दो गुटों के बीच हुए संघर्ष और पथराव ने शहर के शांत माहौल को अचानक तनाव में बदल दिया था।

घटना के बाद सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ कानून-व्यवस्था संभालने की नहीं, बल्कि उस तनाव को शहर के दूसरे हिस्सों तक फैलने से रोकने की थी। पुलिस और प्रशासन ने हालात को गंभीरता से लिया।

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पुलिस कप्तान रजनेश सिंह ने पूरे घटनाक्रम की कमान संभाली, वहीं कलेक्टर संजय अग्रवाल लगातार उनके साथ खड़े रहे।

अब जब स्थिति सामान्य है, तो बिलासपुर इस पूरे घटनाक्रम का जवाब किसी नए विवाद से नहीं, बल्कि शांति और भाईचारे के सामूहिक संदेश से देने जा रहा है।

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इसी सिलसिले में बुधवार को शांति समिति की बैठक हुई, जिसमें अलग-अलग समाजों और समुदायों के प्रतिनिधि एक मंच पर जुटे। बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि 3 सितंबर को शहर में शांति मार्च निकाला जाएगा।

शाम 4 बजे नेहरू चौक से शुरू होने वाला मार्च शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए गांधी चौक पहुंचेगा। इसमें सभी समाजों और समुदायों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।

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तनाव के बीच कप्तान ने संभाला मोर्चा

28 अगस्त की घटना के बाद स्थिति को नियंत्रण में रखना आसान नहीं था। पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ यह चुनौती भी थी कि घटना की प्रतिक्रिया किसी दूसरे इलाके या समुदाय तक न पहुंचे।

एसएसपी रजनेश सिंह ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए लगातार निगरानी रखी और पुलिस बल को उसी अनुरूप सक्रिय रखा।

इस दौरान कलेक्टर संजय अग्रवाल भी पुलिस कप्तान के साथ लगातार समन्वय में रहे। तनावपूर्ण परिस्थितियों में प्रशासन और पुलिस का यह तालमेल महत्वपूर्ण रहा। दोनों अधिकारियों की सक्रिय मौजूदगी ने हालात को संभालने में मदद की और धीरे-धीरे शहर सामान्य स्थिति की ओर लौटा।

शांति समिति की बैठक में एसएसपी रजनेश सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मीडिया की भूमिका की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि तनाव की परिस्थितियों में खबर और अफवाह के बीच फर्क बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है। कई बार ऐसे मौकों पर खबरों को इस तरह पेश किया जाता है कि तनाव और बढ़ सकता है, लेकिन बिलासपुर की मीडिया ने अपनी गरिमा और जिम्मेदारी के अनुरूप अमन-चैन और भाईचारे को प्राथमिकता दी। मीडिया ने हालात को समझते हुए वह सब किया, जिसके लिए एक जिम्मेदार मीडिया जानी जाती है। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन के साथ मीडिया के इस सहयोग ने भी शहर में शांति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में प्रशासन की जिम्मेदारी केवल व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं होती, बल्कि लोगों के भीतर भरोसा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होता है। 28 अगस्त की घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जमीन पर लगातार काम किया और हर स्तर पर संवाद बनाए रखा। उन्होंने कहा कि जब प्रशासन, पुलिस, समाज और मीडिया एक-दूसरे पर भरोसा करते हुए अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, तब किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति को बड़े संकट में बदलने से रोका जा सकता है। बिलासपुर में भी यही सामूहिक जिम्मेदारी दिखाई दी और शहर ने संयम के साथ परिस्थितियों को सामान्य बनाने में सहयोग किया।

पत्थरबाजी को इंकार, शांति मार्च का समर्थन

शांति समिति की बैठक का सबसे अहम फैसला यही रहा कि 3 सितंबर को बिलासपुर की सड़कें तनाव की नहीं, शांति की गवाह बनेंगी। अलग-अलग समाजों के लोग एक साथ चलेंगे और यह संदेश देंगे कि किसी एक घटना को शहर के सामाजिक रिश्तों पर हावी नहीं होने दिया जाएगा।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि बिलासपुर की पहचान शांति, सौहार्द और आपसी भाईचारे से रही है। उन्होंने नागरिकों से संयम बनाए रखने और किसी भी अफवाह या भ्रामक सूचना पर विश्वास नहीं करने की अपील की। साथ ही कहा कि ऐसी सूचनाओं को आगे प्रसारित करने से भी बचना चाहिए।

एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि शहर में अब स्थिति सामान्य है और इसे बनाए रखने में नागरिकों तथा मीडिया का सहयोग महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने आने वाले तीज-त्योहारों को देखते हुए आयोजकों से भी सतर्कता बरतने को कहा। किसी भी आयोजन में नशे की हालत में या हथियार लेकर पहुंचने वालों को शामिल नहीं करने की अपील की गई है।

अब एक जिम्मेदारी समाज की भी

28 अगस्त की रात की घटना ने यह जरूर दिखाया कि सामाजिक तनाव कितनी तेजी से माहौल बदल सकता है, लेकिन उसके बाद जिस तरह पुलिस, प्रशासन, समाज और मीडिया ने संयम बरता, उसने स्थिति को आगे बढ़ने से रोका। अब शांति मार्च उसी सामूहिक संयम को सार्वजनिक रूप देने की कोशिश है।

एसएसपी ने नागरिकों से साफ कहा कि अफवाह, भ्रामक सूचना या विवाद की स्थिति में कानून हाथ में लेने के बजाय तत्काल पुलिस और प्रशासन को सूचना दें। क्योंकि शहर की शांति केवल पुलिस की मौजूदगी से नहीं, बल्कि नागरिकों के भरोसे और जिम्मेदारी से स्थायी होती है।

3 सितंबर का मार्च इसलिए महज एक कार्यक्रम नहीं होगा। यह 28 अगस्त की रात के तनाव के बाद बिलासपुर की ओर से दिया जाने वाला जवाब होगा—कि विवाद के बाद भी शहर अपनी पहचान नहीं बदलता और पत्थरबाजी के बाद भी रास्ता शांति का ही चुना जाता है।

बैठक में एडीएम शिवकुमार बनर्जी, एडिशनल एसपी पंकज पटेल, एसडीएम मनीष साहू सहित शांति समिति के सदस्य, विभिन्न समाजों और संगठनों के प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक तथा मीडिया प्रतिनिधि मौजूद रहे।