दरवाज़े जड़े, लोकतंत्र अड़ा—लिंगिया डीह पर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने, ऑडिटोरियम के बाहर फूटा गुस्सा
सदन में ठप्पा, बाहर तड़ाका—84 दिन से सड़क पर महिलाएं, नगर निगम पर सीधा घेरा

बिलासपुर…नगर निगम बिलासपुर की सामान्य सभा शहर के लखखीराम ऑडिटोरियम में आयोजित हुई। सभा भीतर से सामान्य रही, लेकिन बाहर सियासत उफान पर नजर आई। सदन में सत्ता पक्ष ने बहुमत के साथ 15 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित करा दिए। अंदर की कार्यवाही संयमित रही, पर ऑडिटोरियम के मुख्य द्वार के बाहर लिंगिया डीह के मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ।
सड़क पर महिलाएं, निगम पर ‘ताराशाही’ का आरोप
कांग्रेस पार्षद दिलीप पाटिल की अगुवाई में जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा और ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गोत्री के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय लोग पहुंचे। महिलाओं का आरोप है कि वे पिछले 84 दिनों से सड़क पर धरना दे रही हैं, लेकिन नगर निगम प्रशासन उनकी सुनवाई नहीं कर रहा।
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि वे कई पीढ़ियों से जिस जमीन पर घर बनाकर रह रही हैं, वहां से उन्हें बेदखल किया जा रहा है। उनका आरोप है कि सड़क और अन्य कार्यों के नाम पर मकानों में तोड़फोड़ की गई, जबकि पार्क और अन्य “विलासिता” परियोजनाओं के लिए गरीबों के घर हटाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि वे पट्टा वितरण और वैध अधिकार की मांग कर रही हैं, न कि किसी अवैध कब्जे की।
पार्षद बोले –कोर्ट में मामला, फिर भी दबाव, धमकियां
दिलीप पाटिल ने कहा कि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और वे नियमित रूप से पेशी में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के पार्षद होने और प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहने के कारण उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, वे और उनका परिवार वर्षों से उसी स्थान पर निवास कर रहे हैं और अलग से कोई अतिक्रमण नहीं किया गया।
जबरन घुसने की कोशिश” – महापौर का आरोप
मामले में महापौर पूजा विधानी ने आरोप लगाया कि सामान्य सभा के दौरान दिलीप पाटिल प्रदर्शनकारी महिलाओं को लेकर जबरन सदन में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे और हंगामा खड़ा करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि स्थिति बिगड़ने से पहले दरवाजे बंद कर दिए गए। महापौर ने पार्षद पर बेजा कब्जा कर राजनीति करने का आरोप भी लगाया।
हंगामा नहीं होने दिया” – आयुक्त
नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने कहा कि सामान्य सभा की कार्यवाही बाधित न हो, इसलिए एहतियातन दरवाजे बंद किए गए। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया गया है और मामले पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सभा कक्ष के भीतर 15 प्रस्तावों पर मुहर लगी, लेकिन बाहर सुलगता सवाल अब भी खड़ा है—क्या विकास की कीमत गरीबों का घर होगा या समाधान की मेज पर निकलेगा रास्ता?





