बिलासपुर… बारिश के साथ कोटा विधानसभा के वनांचल और आदिवासी इलाकों में मलेरिया का खतरा बढ़ने लगा है। संक्रमण की आशंका और ग्रामीणों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर प्रशासन पर स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने का दबाव भी बढ़ रहा है। इसी कड़ी में क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर प्रभावित गांवों में तत्काल अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की मांग रखी गई। साथ ही स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर भी विशेष स्वास्थ्य प्रबंध सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।

मुलाकात के दौरान बताया गया कि कोटा क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां और दूरस्थ वनांचल होने के कारण बरसात के मौसम में मलेरिया, डेंगू और डायरिया जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। पिछले वर्षों में भी इन बीमारियों से कई ग्रामीणों की जान जा चुकी है। ऐसे में समय पर जांच, उपचार और बचाव की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।

प्रशासन के समक्ष मांग रखी गई कि मलेरिया प्रभावित गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं, संवेदनशील इलाकों में लगभग पांच हजार मच्छरदानियों का वितरण किया जाए तथा बेलगहना या केंदा में 108 एंबुलेंस की स्थायी सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके। इसके अलावा सभी स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त दवाइयों और जांच सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने, नियमित फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव कराने तथा डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की अनिवार्य उपस्थिति बनाए रखने की भी मांग की गई।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य विभाग प्रभावित क्षेत्रों में लगातार शिविर लगाकर जांच और उपचार कर रहा है। मरीजों की सुविधा के लिए मोबाइल एंबुलेंस भी संचालित की जा रही है तथा स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

स्वास्थ्य मंत्री को भेजे गए पत्र में भी मांग दोहराई गई है कि कोटा जैसे वनांचल क्षेत्रों के लिए सामान्य व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। मौसमी बीमारियों से प्रभावी मुकाबले के लिए अतिरिक्त स्वास्थ्य संसाधन, पर्याप्त चिकित्सकीय स्टाफ और स्थायी आपात चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि संक्रमण पर समय रहते नियंत्रण पाया जा सके।