30 अप्रैल की डेडलाइन: कलेक्टर का अल्टीमेटम—अधूरे आवास हर हाल में पूरे करो, कोटा को दिया सख्त नाराजगी
25 हजार से ज्यादा घर अभी निर्माणाधीन—मनरेगा, जल संरक्षण और ‘नवा तरिया’ कार्यों की पंचायतवार समीक्षा

बिलासपुर…जिले में आवास निर्माण की धीमी रफ्तार पर प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है। कलेक्टर संजय कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 30 अप्रैल तक सभी अपूर्ण आवास हर हाल में पूरे किए जाएं। समीक्षा बैठक में प्रगति को लेकर सीधे सवाल उठे और जहां काम सुस्त मिला, वहां नाराजगी भी खुलकर सामने आई।
जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, पीएम-जनमन योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा हुई। आंकड़ों ने स्थिति की गंभीरता भी सामने रखी—वित्तीय वर्ष 2024-26 के तहत स्वीकृत 71 हजार 508 आवासों में से 45 हजार 889 पूरे हो चुके हैं, जबकि 25 हजार 619 अब भी निर्माणाधीन हैं। कलेक्टर ने तकनीकी अमले को स्पष्ट लक्ष्य देते हुए कहा कि शेष सभी आवास 30 अप्रैल तक पूर्ण होने चाहिए।
बैठक में कोटा जनपद पंचायत की प्रगति पर खासतौर पर नाराजगी जताई गई। पीएम-जनमन योजना में अपेक्षित काम नहीं दिखने पर संबंधित अधिकारियों को चेतावनी दी गई और तुरंत सुधार के निर्देश दिए गए। संकेत साफ था—लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी।
आवास निर्माण के साथ जल संरक्षण को भी बैठक में प्राथमिकता दी गई। हर आवास में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जोड़ने पर जोर दिया गया, वहीं “नवा तरिया आय के जरिया” योजना के तहत नए तालाबों के चयन और शीघ्र निर्माण के निर्देश दिए गए।
मनरेगा के कार्यों की पंचायतवार समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने अपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने को कहा। प्लिंथ स्तर पर अटके आवासों और निर्माणाधीन कार्यों में 90 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराकर गति बढ़ाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े लंबित कार्यों को भी अप्रैल अंत तक पूरा करने की समय-सीमा तय की गई।
जिला विकास प्राधिकरण के लंबित और अप्रारंभ कार्यों पर भी सख्ती दिखाई गई। कलेक्टर ने साफ कर दिया कि 30 अप्रैल की डेडलाइन सिर्फ लक्ष्य नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने की तारीख होगी—जहां काम पूरा नहीं हुआ, वहां जिम्मेदारी भी तय होगी।





