बैंड बाजे के साथ क्यों धान बेचने पहुंचा किसान..? बलरामपुर में ‘किसान हितैषी’ दावों की खुली पोल

बलरामपुर (पृथ्वी लाल केशरी) ।किसानों के हितैषी होने के सरकारी दावों की हकीकत बलरामपुर जिले में उस वक्त उजागर हो गई, जब एक किसान को अपनी ही उपज बेचने के लिए हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। न्यायालय के आदेश के बाद ही किसान अपना 525 बोरी धान बेच सका—वह भी बैंड-बाजे के साथ।
जिले के ग्राम चितविश्रामपुर निवासी किसान राजदेव मिंज का धान सिर्फ इसलिए खरीदी केंद्र में नहीं लिया गया क्योंकि वे ऑनलाइन टोकन नहीं करा पाए थे। समय सीमा समाप्त होने का हवाला देकर प्रशासन ने खरीदी से साफ इनकार कर दिया।
बार-बार गुहार के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो आखिरकार किसान ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद प्रशासन को निर्देश दिया कि किसान का धान खरीदा जाए।
राजदेव मिंज बैंड-बाजे के साथ बरदर धान खरीदी केंद्र पहुंचे। कोर्ट के आदेश पर समिति खोली गई और पूरे 525 बोरी धान की तौल की गई। यह जश्न सिर्फ अपनी जीत का नहीं, बल्कि न्यायपालिका के प्रति आभार का था।
किसान राजदेव मिंज ने कहा, “अगर कोर्ट का सहारा नहीं मिलता, तो मेरा धान यूं ही पड़ा रह जाता। यह जश्न न्याय के सम्मान में है।”
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है – क्या छत्तीसगढ़ में किसान को अपनी फसल बेचने के लिए अदालत जाना पड़ेगा…? ऑनलाइन टोकन जैसी व्यवस्था क्या सुविधा है या बाधा…? और सबसे बड़ा सवाल—जो किसान कोर्ट तक नहीं पहुंच सकते, उनका क्या होता होगा….?
एक तरफ सरकार किसानों के लिए योजनाओं और सहूलियतों की बात करती है, दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि प्रशासनिक लापरवाही और तकनीकी जटिलताओं के बीच किसान पिस रहा है।




