CG News/आंध्र प्रदेश के सीमावर्ती जंगलों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। पिछले 48 घंटों से जारी इस व्यापक नक्सल उन्मूलन अभियान ने माओवादी संगठन की नींव हिलाकर रख दी है। सुरक्षा बलों के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में अब तक 13 नक्सलियों के मारे जाने की खबर है।

इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता खूंखार नक्सली कमांडर और केंद्रीय कमेटी के सदस्य माडवी हिडमा का मारा जाना बताया जा रहा है। इस कार्रवाई में हिडमा के साथ उसकी पत्नी और कई अन्य बड़े कैडर भी ढेर हुए हैं, जिससे लाल आतंक को एक ऐसा झटका लगा है जिससे उबरना उनके लिए नामुमकिन सा प्रतीत होता है।

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सुरक्षा बलों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जंगल में चले इस सर्च ऑपरेशन के दौरान कुल 13 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं। इनमें हिडमा की पत्नी राजे समेत 6 नक्सलियों के शव दूसरे दिन बरामद हुए, जबकि अभियान के पहले दिन यानी 19 नवंबर को 7 माओवादियों के शव मिले थे।

मारे गए नक्सलियों में स्टेट कमेटी मेंबर टेक शंकर का नाम भी शामिल है, जिसकी बस्तर में भी काफी सक्रियता रही थी। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सचिव और बटालियन-1 के कमांडर माडवी हिडमा का मारा जाना सुरक्षा बलों के लिए ऐतिहासिक जीत मानी जा रही है, क्योंकि वह कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रहा है।

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आंध्र प्रदेश पुलिस की यह कार्रवाई केवल मुठभेड़ तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने माओवादी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए घेराबंदी भी की।

इन दो दिनों के भीतर पुलिस ने अलग-अलग इलाकों से 50 नक्सलियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। मुठभेड़ में मारे गए और गिरफ्तार किए गए नक्सलियों को मिलाकर कुल 63 लोग माओवादी संगठन से बाहर हो चुके हैं। इतने बड़े पैमाने पर शीर्ष नेतृत्व और लड़ाकों का सफाया होना नक्सली तंत्र के लिए अब तक का सबसे भारी झटका है।

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इस बड़ी कार्रवाई पर बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ में ढेर हुए नक्सलियों की शिनाख्त की जा रही है।

यदि इनमें कोई बस्तर क्षेत्र का निवासी पाया जाता है, तो उसके अनुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 50 माओवादियों का पूरा ब्यौरा मंगवाया जा रहा है ताकि उनके मूल निवास और पुरानी गतिविधियों के आधार पर आगे की जांच बढ़ाई जा सके। आईजी ने स्पष्ट किया कि लगातार चल रहे अभियानों के कारण माओवादी संगठन अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है और उसका दायरा तेजी से सिमट रहा है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के चलते अब तक अलग-अलग ऑपरेशन में 450 से अधिक नक्सलियों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 2 हजार से ज्यादा नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि अब पूरे बस्तर क्षेत्र में केवल डेढ़ सौ के आसपास ही नक्सली बचे हैं, जिन पर फोर्स की पैनी नजर बनी हुई है।

उन्होंने जंगल में छिपे बचे हुए कैडर को साफ संदेश दिया है कि वे जल्द से जल्द मुख्यधारा में लौट आएं, अन्यथा सुरक्षा बलों का यह सख्त अभियान इसी तरह जारी रहेगा और हिंसा का अंत निश्चित है।