CG Bilaspur High Court/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में पदस्थ एक सरकारी शिक्षक का जाति प्रमाणपत्र बिना नोटिस दिए और पक्ष रखने का अवसर प्रदान किए रद्द करने के मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने बीजापुर की जिला स्तरीय प्रमाणपत्र सत्यापन समिति के आदेश को निरस्त कर दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जाति प्रमाणपत्र की जांच और उसे रद्द करने की कार्रवाई कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सक्षम प्राधिकारी ही कर सकता है। इस दौरान प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना भी अनिवार्य है।

मामला बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के शासकीय माध्यमिक शाला मातनार में शिक्षक (एलबी) के पद पर कार्यरत प्रभात कुमार संगम से जुड़ा है। बीजापुर की जिला स्तरीय प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने उनके जाति प्रमाणपत्र को फर्जी और कूटरचित बताते हुए निरस्त कर दिया था। इसके साथ ही प्रमाणपत्र के आधार पर प्राप्त लाभों की वसूली और सेवा समाप्ति सहित अन्य कार्रवाई की सिफारिश भी की गई थी। समिति के इस आदेश और अनुशंसा को चुनौती देते हुए शिक्षक ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

CG Bilaspur High Court/याचिका में शिक्षक की ओर से दलील दी गई कि छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति प्रमाणन विनियमन) अधिनियम, 2013 के तहत जिला स्तरीय समिति को जाति प्रमाणपत्र रद्द करने का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता के अनुसार, जिला स्तरीय समिति की भूमिका संबंधित दस्तावेजों और निष्कर्षों के साथ मामले को उच्च स्तरीय प्रमाणपत्र छानबीन समिति के समक्ष भेजने तक सीमित है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि जिला स्तरीय समिति ने शिक्षक को नोटिस जारी किए बिना और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिए बिना ही जाति प्रमाणपत्र रद्द करने का आदेश पारित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के आदेश के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, क्योंकि इसके आधार पर सेवा समाप्ति और पहले से प्राप्त लाभों की वसूली जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिला स्तरीय समिति ऐसे अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकती, जो कानून के तहत उच्च स्तरीय प्रमाणपत्र छानबीन समिति को सौंपा गया है। किसी व्यक्ति के जाति प्रमाणपत्र को लेकर प्रतिकूल निर्णय लेने से पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी है।

हाई कोर्ट ने जिला स्तरीय समिति का आदेश निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को कानून के अनुसार मामला उच्च स्तरीय प्रमाणपत्र छानबीन समिति के पास भेजने की छूट दी है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि मामला सक्षम समिति को भेजा जाता है, तो शिक्षक को पर्याप्त सुनवाई का अवसर देने के बाद ही नियमानुसार उचित आदेश पारित किया जाए।