बिलासपुर…मेहनत, लगन और शोध के प्रति समर्पण जब उपलब्धि में बदलता है तो वह केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं रह जाती, बल्कि परिवार, संस्थान और शहर के लिए भी गर्व का अवसर बन जाती है। बिलासपुर की डॉ. मीमांसा पटेल ने ओरल पैथोलॉजी एवं माइक्रोबायोलॉजी में पीएचडी की उपाधि हासिल कर ऐसी ही उपलब्धि दर्ज की है। उन्हें महाराष्ट्र के वर्धा स्थित अदाणी इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई।

राजस्व कॉलोनी, सरकंडा निवासी डॉ. मीमांसा पटेल, डॉ. जी.डी. पटेल की सुपुत्री हैं। वे बोदरी स्थित त्रिवेणी इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज, हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में ओरल पैथोलॉजी एवं माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रोफेसर तथा विभागाध्यक्ष हैं। इस उपलब्धि के साथ वे संस्थान के दंत चिकित्सा संकाय में पीएचडी प्राप्त करने वाली पहली सदस्य भी बन गई हैं।

डॉ. मीमांसा ने अपने शोध में तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों की लार में डीएनए मिथाइलेशन का अध्ययन किया। डॉ. अलका हांडे के मार्गदर्शन में किए गए इस शोध का महत्व मुख कैंसर के जोखिम की शुरुआती पहचान से जुड़ा है। अध्ययन से ऐसे संकेतकों और जांच के तरीकों को विकसित करने की संभावनाएं सामने आती हैं, जो भविष्य में बीमारी के खतरे को समय रहते पहचानने और शुरुआती स्तर पर जांच में मददगार हो सकते हैं।

अपनी इस शैक्षणिक उपलब्धि पर डॉ. मीमांसा पटेल ने शोध मार्गदर्शक, शिक्षकों, संस्थान, वरिष्ठजनों, सहकर्मियों, परिवार और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनकी यह सफलता चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाली उपलब्धि है।