रायपुर। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) ने प्रदेश के चिकित्सकों से जुड़ी चार महत्वपूर्ण एवं लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री एवं स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर शीघ्र विभागीय कार्रवाई एवं आवश्यक आदेश जारी करने की मांग की है।

फेडरेशन ने पत्र में उल्लेख किया है कि इन मांगों में से तीन पर पूर्व में स्वास्थ्य मंत्री द्वारा सकारात्मक सहमति एवं अनुमोदन दिया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक संबंधित विभागीय आदेश जारी नहीं हुए हैं।

वहीं, PG उत्तीर्ण नियमित चिकित्सकों के विभाग परिवर्तन का महत्वपूर्ण विषय भी शासन के संज्ञान में लाया गया है। इससे प्रदेश के चिकित्सकों में निराशा एवं असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

CGDF की प्रमुख चार मांगें निम्नलिखित हैं

1. उच्च शिक्षा के लिए NOC प्रक्रिया का सरलीकरण

चिकित्सकों को उच्च शिक्षा हेतु NOC प्राप्त करने के लिए संपत्ति गिरवी रखने की अनिवार्य शर्त पूर्णतः समाप्त की जाए। अन्य राज्यों की तर्ज पर केवल शपथ-पत्र (Affidavit) के आधार पर NOC प्रदान करने की व्यवस्था लागू की जाए, ताकि चिकित्सक बिना आर्थिक एवं कानूनी बाधाओं के उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें।

2. अनुबंधित MBBS चिकित्सकों का मानदेय 70,000 प्रतिमाह किया जाए

MBBS बॉन्डेड चिकित्सकों का मानदेय सामान्य क्षेत्र में 70,000 प्रतिमाह निर्धारित करने पर पूर्व में सहमति दी जा चुकी है, लेकिन अब तक इस संबंध में विभागीय आदेश जारी नहीं हुआ है। CGDF ने शीघ्र आदेश जारी कर चिकित्सकों को इसका लाभ प्रदान करने की मांग की है।

3. अनुबंधित PG (MD/MS) चिकित्सकों के मानदेय की विसंगति दूर की जाए

फेडरेशन ने मांग की है कि PG तृतीय वर्ष के चिकित्सकों को मिलने वाले मानदेय से ₹2,000 अधिक, अर्थात लगभग ₹95,000 प्रतिमाह मानदेय निर्धारित करने पर हुई सहमति को तत्काल लागू किया जाए। इस संबंध में भी विभागीय कार्रवाई लंबित है।

4. PG उत्तीर्ण नियमित चिकित्सकों का विशेषज्ञता के अनुसार विभाग परिवर्तन किया जाए

फेडरेशन ने मांग की है कि अध्ययन अवकाश पर PG (MD/MS) की पढ़ाई पूर्ण कर वापस लौटने वाले नियमित चिकित्सकों को उनकी अर्जित विशेषज्ञता के अनुसार संबंधित विभाग में पदस्थ किया जाए। वर्तमान में कई चिकित्सकों को PG की डिग्री प्राप्त करने के बाद भी उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप विभाग आवंटित नहीं किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई चिकित्सक अध्ययन अवकाश से पूर्व रेडियोलॉजी विभाग में कार्यरत था और उसने PG सर्जरी विषय में किया है, तो उसे नियमानुसार सर्जरी विभाग में पदस्थ किया जाना चाहिए। इससे चिकित्सकों की विशेषज्ञता का समुचित उपयोग होगा तथा शासन द्वारा उच्च शिक्षा पर किए गए निवेश का लाभ मरीजों एवं स्वास्थ्य संस्थानों को मिल सकेगा।

जेडीए रायपुर के अध्यक्ष डॉ. पीयूष ने कहा कि चिकित्सक प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं।

उनकी जायज मांगों पर केवल सहमति देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन पर समयबद्ध तरीके से आदेश जारी करना भी आवश्यक है। लंबे समय से लंबित इन विषयों के कारण चिकित्सकों के शैक्षणिक अवसर, आर्थिक हित एवं भविष्य प्रभावित हो रहे हैं।

जेडीए छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया है कि सभी चारों विषयों पर शीघ्र विभागीय कार्रवाई पूर्ण कर आवश्यक आदेश जारी किए जाएं, ताकि प्रदेश के चिकित्सकों को राहत मिल सके और राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके।