जयपुर। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकारी स्कूलों में मीडिया, आमजन व भामाशाहों के प्रवेश पर प्रतिबंध तथा मोबाइल-वीडियोग्राफी पर रोक के आदेश को तुगलकी फरमान करार दिया।

दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि सुरक्षा के नाम पर स्कूलों की बदहाली छुपाने की कोशिश की जा रही है। पीसीसी में मीडिया से बातचीत करते हुए डोटासरा ने कहा कि स्कूलों में जर्जर भवन, खराब शौचालय, बारिश में पानी टपकना और सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएं हैं। सरकार इन्हें दूर करने के बजाय कवरेज रोक रही है।

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उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस स्कूलों में जाएगी और बच्चों की स्थिति सामने लाएगी। यह मुद्दा विधानसभा में उठाया जाएगा।जूली ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी भी अधिकार है। बच्चों द्वारा स्कूल की हालत की वीडियो बनाने पर भी रोक लगाना डरपोक रवैया है। उन्होंने रिक्त पदों, गिरते नामांकन और 3768 जर्जर स्कूलों का जिक्र करते हुए सरकार को मानसिक दिवालिया बताया। दोनों नेताओं ने आमजन में आक्रोश की चेतावनी दी।

बता दें कि राजस्थान शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों (जिसमें मीडियाकर्मी भी शामिल हैं) के प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन निर्देशों के तहत, छात्रों या स्कूल की गतिविधियों से जुड़ी फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के लिए स्कूल के प्रिंसिपल या संस्थान के प्रमुख से पहले अनुमति लेनी होगी। 

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माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार द्वारा रविवार को जारी आदेश के अनुसार, प्रिंसिपल या स्कूल के अधिकृत अधिकारियों की पूर्व अनुमति के बिना किसी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। हर विजिटर को रजिस्टर में एंट्री करनी होगी। सभी विजिटर्स को स्कूल में प्रवेश करने से पहले विजिटर रजिस्टर में अपनी जानकारी दर्ज करनी होगी।

बाहरी लोगों को क्लासरूम, लेबोरेटरी, लाइब्रेरी, हॉस्टल, खेल के मैदान, रेस्टरूम या उन अन्य क्षेत्रों में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी, जहां छात्रों की गतिविधियां हो रही हों, जब तक कि उनके साथ प्रिंसिपल, कोई शिक्षक या स्कूल का कोई अन्य अधिकृत अधिकारी न हो।

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साथ ही, फोटो, वीडियो और लाइव स्ट्रीमिंग के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक है। प्रिंसिपल की पूर्व लिखित अनुमति के बिना छात्रों, शिक्षकों या स्कूल की गतिविधियों से संबंधित फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, साक्षात्कार, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की जा सकती है।

इस आदेश में छात्रों की तस्वीरें, वीडियो या निजी जानकारी को किसी भी तरह से इकट्ठा करने या फैलाने पर भी रोक लगाई गई है, जिससे उनकी प्राइवेसी, सम्मान या सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
अगर कोई बिना इजाजत स्कूल में घुसता है, परिसर से बाहर जाने से मना करता है, फोटो या वीडियो लेने की कोशिश करता है या स्कूल की गतिविधियों में रुकावट डालता है, तो प्रिंसिपल को निर्देश दिया गया है कि वे तुरंत स्थानीय पुलिस और जिला शिक्षा अधिकारी को इसकी सूचना दें।

प्रिंसिपल किसी भी ऐसे विजिटर को अंदर आने से रोक सकते हैं, जिसकी मौजूदगी से स्कूल की सुरक्षा, छात्रों की प्राइवेसी, अनुशासन या पढ़ाई-लिखाई के माहौल को खतरा हो सकता है। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस की मदद से किसी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर से बाहर भी निकाला जा सकता है।

शिक्षा विभाग ने सभी सुपरवाइजरी अधिकारियों और संस्थानों के प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे इन गाइडलाइंस का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। विभाग ने इस बात पर जोर दिया है कि छात्रों की सुरक्षा और प्राइवेसी सबसे जरूरी है और स्कूलों को इन नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।