बिलासपुर…अरपा नदी को साफ रखने की कवायद अब केवल नदी के किनारे तक सीमित नहीं रहेगी। शहर के 70 छोटे-बड़े नालों से होकर अरपा में पहुंच रहे दूषित पानी को रोकने के लिए प्रत्येक नाले की स्थिति, पानी की मात्रा और उपचार की जरूरत का अलग-अलग आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर दीर्घकालीन समाधान की समग्र कार्ययोजना और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार होगा।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने मंगलवार को कलेक्टोरेट के मंथन सभाकक्ष में नगरीय निकायों के कामकाज और विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। उन्होंने साफ किया कि नालों का पानी बिना उपचार नदी में न पहुंचे, इसके लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है जो केवल तत्काल समाधान न दे, बल्कि आने वाले वर्षों की जरूरतों को भी पूरा कर सके।

बैठक में सामने आया कि शहर के 70 छोटे-बड़े नाले सीधे अरपा में मिलते हैं। प्रमुख सचिव ने प्रत्येक नाले की मौजूदा स्थिति और उसमें आने वाले पानी की मात्रा का आकलन करने के साथ उपचार की तकनीकी व्यवहार्यता जांचने को कहा। डीपीआर तैयार करते समय भविष्य की जरूरत, रखरखाव और योजना के दीर्घकालीन प्रभावों को भी शामिल करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने सतही जल स्रोतों के संरक्षण को आने वाले समय की प्राथमिक जरूरत बताया।

शहर की सफाई और यातायात पर समीक्षा

बैठक में शहर की स्वच्छता और यातायात व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। स्वच्छता व्यवस्था में सुधार को लगातार बनाए रखने और नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। यातायात को सुगम बनाने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई गई।

प्रधानमंत्री आवास योजना समेत केंद्र और राज्य की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए प्रमुख सचिव ने स्वीकृत विकास कार्यों को समय-सीमा में पूरा करने और निर्माण की गुणवत्ता पर निगरानी रखने को कहा। नगरीय सेवाओं से जुड़ी परियोजनाओं को लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखने के लिए सौर ऊर्जा आधारित विकल्पों पर भी विचार करने के निर्देश दिए गए।

निर्माणाधीन नालंदा परिसर की प्रगति की जानकारी भी ली गई। अधिकारियों के अनुसार 500 लोगों की बैठक क्षमता वाले इस परिसर को आधुनिक शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रथम तल का स्लैब पूरा हो चुका है, जबकि द्वितीय तल का करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हुआ है।

नगरीय अधोसंरचना के तहत स्वीकृत 542 कार्यों में से 334 पूरे हो चुके हैं, 182 प्रगतिरत हैं और 26 कार्य अभी शुरू नहीं हुए हैं। प्रमुख सचिव ने लंबित कार्यों में तेजी लाने के साथ गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने कहा।

कैमरों और यातायात व्यवस्था की पड़ताल

समीक्षा के बाद प्रमुख सचिव ने कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह और निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे के साथ तारबाहर स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण किया। उन्होंने एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली की कार्यप्रणाली और संचालन को देखा।

शहर की यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को और उपयोगी बनाने के लिए मौजूदा प्रणाली की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने तथा आगे की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने इस व्यवस्था को प्रदेश के दूसरे शहरों में लागू करने की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा।

बैठक में सूडा के सीईओ सुमित अग्रवाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।