बिलासपुर। ईएसआईसी की स्टाफ नर्स भर्ती में चयनित अभ्यर्थी के नौकरी जॉइन नहीं करने के बाद मेरिट सूची में अगली अभ्यर्थी की उम्मीदवारी पर विचार नहीं करने को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने उचित नहीं माना है।

जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की बिलासपुर बेंच का आदेश रद्द करते हुए ईएसआईसी को याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी पर दो महीने के भीतर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है।

मामला वर्ष 2019 में ईएसआईसी की ओर से फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स के पदों पर निकाली गई भर्ती से जुड़ा है।

स्टाफ नर्स के 17 पदों में एक पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित था। धमतरी निवासी दीप्ति साहू ने इसी पद के लिए आवेदन किया था। मेरिट सूची में उन्हें 63.26 अंक के साथ 18वां स्थान मिला था।

ओबीसी वर्ग में दीप्ति साहू से ऊपर राखी पाल का नाम था। राखी पाल को 66.03 अंक मिले थे और उनका चयन हो गया था। हालांकि, चयन के बाद राखी पाल ने 24 जुलाई 2019 को ईएसआईसी को नौकरी जॉइन नहीं करने की सूचना दे दी।

इसके बावजूद मेरिट सूची में उनके बाद आने वाली दीप्ति साहू की उम्मीदवारी पर विचार नहीं किया गया।

इसके बाद दीप्ति साहू ने पहले ईएसआईसी के समक्ष अपनी दावेदारी रखी।

वहां से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की बिलासपुर बेंच का रुख किया, लेकिन वहां भी उनके पक्ष में फैसला नहीं आया। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

हाई कोर्ट ने 25 प्रतिशत रिजर्व सूची के प्रावधान का किया उल्लेख

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया से संबंधित 21 जून 2019 को जारी प्रशासनिक निर्देशों का उल्लेख किया। इन निर्देशों में चयन सूची अंतिम होने के बाद 25 प्रतिशत रिजर्व सूची या पैनल तैयार करने का प्रावधान था। किसी चयनित अभ्यर्थी की उम्मीदवारी निरस्त होने या उसके भर्ती प्रक्रिया से हटने की स्थिति में चयन सूची में संशोधन कर अतिरिक्त उम्मीदवारों को मौका देने की व्यवस्था भी की गई थी।

हाई कोर्ट ने कहा कि भर्ती नियमों में प्रतीक्षा सूची से संबंधित स्पष्ट प्रावधान नहीं होने की स्थिति में भी सक्षम अधिकारी की ओर से जारी प्रशासनिक निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।

कोर्ट के अनुसार, संबंधित अधिकारियों ने इन निर्देशों के अनुरूप रिजर्व सूची तैयार नहीं की।

इन परिस्थितियों को देखते हुए डिवीजन बेंच ने CAT की बिलासपुर बेंच के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही ईएसआईसी को निर्देश दिया कि वह दीप्ति साहू की उम्मीदवारी पर प्रशासनिक निर्देशों और भर्ती प्रक्रिया के अनुरूप दो महीने के भीतर नए सिरे से विचार करे।

हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद अब उनकी उम्मीदवारी पर संबंधित नियमों और मेरिट के आधार पर निर्णय लिया जाना है।