बिलासपुर/छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नाबालिग छात्रा के कथित अपहरण और दुष्कर्म के मामले में आरोपी युवक को दोषमुक्त कर दिया है।

इस मामले में निचली अदालत ने आरोपी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए यह माना कि यह मामला अपहरण या जबरदस्ती का नहीं, बल्कि आपसी प्रेम संबंध का था।

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यह मामला वर्ष 2015 का है। रायपुर निवासी एक व्यक्ति ने 2 अक्टूबर 2015 को अपनी नाबालिग बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पिता ने पुलिस को बताया था कि 1 अक्टूबर को उसकी बेटी कॉलेज गई थी, लेकिन वह वापस नहीं लौटी। पुलिस ने तत्काल जांच शुरू करते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 366 (अपहरण) के तहत अपराध दर्ज किया। लगभग छह माह बाद, मार्च 2016 में पुलिस ने छात्रा को आरोपी युवक के साथ बरामद किया।

छात्रा के बयान के अनुसार, आरोपी ने पहले उसके दोस्त के माध्यम से उससे संपर्क किया और मिलने के लिए बुलाया। छात्रा ने बताया कि वह खुद बस से पाटन पहुंची थी, जहां से आरोपी उसे अपनी मोटरसाइकिल में लेकर एक अन्य गांव गया।

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दोनों करीब पांच महीने तक किराए के मकान में साथ रहे और फिर दुर्ग चले गए। छात्रा ने अपने बयान में यह भी कहा था कि आरोपी ने उससे शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए थे।

हाईकोर्ट में आरोपी की अपील की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि छात्रा ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से यह स्वीकार किया था कि वह आरोपी के साथ कई महीनों तक अपनी मर्जी से रही थी।

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उसने मंदिर में शादी करने और नोटरी के समक्ष हलफनामा देने की बात भी कबूल की थी। न्यायालय ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब पीड़िता छह महीने तक आरोपी के साथ रही और कई जगहों पर उसके साथ गई, तो यह कहना कि उसे जबरदस्ती साथ रखा गया था, विश्वसनीय प्रतीत नहीं होता है।

न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि पीड़िता का यह कहना कि वह आरोपी द्वारा परेशान किए जाने के कारण उसके साथ रहने लगी, तर्कसंगत नहीं है। इन सभी साक्ष्यों और बयानों पर गौर करने के बाद, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।