सूरजपुर (मनीष जायसवाल) । छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में चल रही युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया की खाना पूर्ति हो चुकी है लेकिन शिक्षकों के पोल खोल अभियान के बाद से न्यायालय तक चले इस विरोध के बाद अब न्याय बनाम नीति की बड़ी बहस में बदल चुकी है..। भले ही सरकार इसे शिक्षा सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, लेकिन शिक्षकों के बीच यह असंतोष और अविश्वास का विषय तो बना ही हुआ है। अदालतों से लेकर समितियों तक न्याय की तलाश अब भी जारी है..! पर सवाल वही है क्या शिक्षकों को वास्तव में न्याय मिला..?

सरकार के अनुसार प्रदेश के 10,538 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण कर 16,165 शिक्षकों और प्राचार्यों का समायोजन किया गया..। जिलों के शिक्षा अधिकारी से लेकर कलेक्टरों तक ने इस प्रक्रिया को लीड किया । अब दावा है कि कोई भी स्कूल शिक्षक-विहीन नहीं है और एकल शिक्षकीय विद्यालयों की संख्या घटकर 1200 के करीब रह गई है। लेकिन ये आंकड़े जमीनी सच्चाई से मेल नहीं खाते। ग्रामीण इलाकों के कई स्कूल आज भी शिक्षक विहीन है, जबकि शहरों में पदों की भरमार है..।

ये खबर भी पढ़ें…
दुर्ग में 10 लाख की जमीन धोखाधड़ी का खुलासा: कम समय में ज्यादा मुनाफे का झांसा देकर हड़पे पैसे, आरोपी दलाल गिरफ्तार
दुर्ग में 10 लाख की जमीन धोखाधड़ी का खुलासा: कम समय में ज्यादा मुनाफे का झांसा देकर हड़पे पैसे, आरोपी दलाल गिरफ्तार
Cg news।छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जमीन खरीद-बिक्री के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने का एक बड़ा मामला...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर छोटे बड़े करीब 21 शिक्षक संगठनों ने मिल रायपुर से लेकर जिला तक आंदोलन किया। व्यवस्था के जिम्मेदार लोगों ने इतना बड़ा विरोध समझ कर सुधार तक नहीं किया। शिक्षकों का कहना था कि यह पूरी प्रक्रिया डेटा आधारित नहीं बल्कि पसंद और प्रभाव आधारित रही। कही विज्ञान के शिक्षक को कला विषय में समायोजित कर दिया गया, तो सालों एक उसी स्कूल में सेवा देने वाले वरिष्ठ शिक्षकों को अतिशेष घोषित कर दिया गया..। सूची प्रकाशन से लेकर काउंसलिंग तक जिले जिलों में वहां के मौसम को देखते हुए नियम चले कई जिलों में तो प्रकिया पारदर्शिता न होने से शिक्षकों ने भारी नाराजगी भी जताई थी..।बहुत से जिलों में शिक्षकों ने प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया था।

जब मामला अदालत पहुंचा तो कोर्ट ने उन शिक्षकों को राहत दी जिन्होंने नई पदस्थापना में कार्यभार ग्रहण नहीं किया था। अदालत ने आदेश दिया था कि वे तीन दिन के भीतर अपनी आपत्तियां जिला स्तरीय समिति के सामने रख सकेंगे और समिति को तीन दिन में निर्णय देना होगा। लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जो शिक्षक पहले से ज्वाइन कर चुके हैं, उनके लिए कार्रवाई पर रोक नहीं है। यानी राहत सीमित थी पर न्याय अधूरा तो नहीं रहा ..।

ये खबर भी पढ़ें…
कांस्टेबल भर्ती 2017 मामले में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: राज्य सरकार की SLP खारिज, प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ
कांस्टेबल भर्ती 2017 मामले में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: राज्य सरकार की SLP खारिज, प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ
दिल्ली।छत्तीसगढ़ में वर्ष 2017 की पुलिस कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि जिन अफसरों की निगरानी में अनियमितताएं हुई, वही अधिकारी समितियों में सुनवाई किए है..। शिक्षक संघों का कहना है कि जब दोषी ही पंच परमेश्वर बन जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए..? वही हुआ ..। इस बीच विरोध का नया तरीका शिक्षक संघ ने पोल खोल अभियान चलाकर इन गड़बड़ियों का खुलासा किया जिसके बाद सरकार ने जांच का आश्वासन दिया था, मगर ठोस सुधार समझ तक नही आया..!

शिक्षकों का दर्द यह भी है कि उनके जीवन की दशकों की स्थिरता एक झटके में छिन गई। कई शिक्षक 100–150 किलोमीटर दूर भेज दिए गए, बिना इस पर विचार किए कि वे विषय-विशेषज्ञ हैं या नहीं। जिनके स्थानांतरण पर आपत्ति की गई, उन्हें वेतन रोके जाने की चेतावनी दी गई। न्याय की प्रक्रिया इतनी धीमी और सीमित रही कि राहत मिलने से पहले ही कई शिक्षक हताश हो गए है..।

ये खबर भी पढ़ें…
लालबागचा राजा के चरणों में पहले दिन आए 48.50 लाख रुपए, एफडीए ने महाप्रसाद और खाद्य सुरक्षा को लेकर जारी किए कड़े निर्देश
लालबागचा राजा के चरणों में पहले दिन आए 48.50 लाख रुपए, एफडीए ने महाप्रसाद और खाद्य सुरक्षा को लेकर जारी किए कड़े निर्देश
मुंबई।देशभर में गणेश उत्सव का पर्व बेहद उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है. मुंबई के प्रसिद्ध 'लालबागचा...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

सरकार के तर्क और शिक्षकों की पीड़ा के बीच खींचतान अदालतों तक पहुंच चुकी थी सरकार अपने ढोल में पोल समझते हुए शिक्षकों की पीड़ा समझने में बहुत देर हो चुकी थी। दरियादिली के नाम पर मलहम ऐसा लाए कि सरकार के आदेश से बनी कमेटियों के जाल में शिक्षक फंसे हुए रहे। क्योंकि अब तक न्यायालय से आस छूट चुकी थी..। कुछ लोग किस्मत वाले रहे आपदा में अवसर तलाशते हुए ऊंची पहुंच और जुगाड़ के दम पर मन चाही जगह हासिल भी कर लिए लेकिन आम शिक्षक तो कांटो पर ही चला है..। इस बीच खबरें आई कि 13 नवंबर को सरगुजा संभाग कमिश्नर कार्यालय में कुछ प्रकरणों की सुनवाई हुई, लेकिन शिक्षकों का कहना है कि उन्हें उम्मीद से ज्यादा औपचारिक जवाब मिले पर न्याय नही..।

शिक्षकों के अलावा 33 जिलों और 146 ब्लॉकों के शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी जिन्होंने महीनों तक ओवरटाइम और निरंतर भागदौड़ कर इस प्रक्रिया के पहले और बाद में उस पर मेहनत की है वे भी भीतर ही भीतर इसकी थकान और उलझन महसूस कर रहे हैं। अब मामला सिर्फ पदस्थापना का नहीं रहा असल में पूरे तंत्र पर से उठते विश्वास का सवाल बन चुका है..। युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य जहां युक्ति और न्याय था ..। वही इसकी प्रक्रिया में अयुक्ति और अन्याय की परतें गहरी चोट छोड़ गई। एक ऐसी चोट जिसे सबने देखा, पर सुविधानुसार अनदेखा कर दिया..। यह अब सिर्फ प्रशासनिक निर्णयों की बहस नहीं रही यह व्यवस्था की विश्वसनीयता की सबसे कठिन परीक्षा है। क्योंकि जब वही शिक्षक असंतुष्ट, अस्थिर और उपेक्षित रह जाएंगे, जिनकी जिम्मेदारी बच्चों को न्याय–अन्याय का बोध कराना है, तब शिक्षा सुधार की नींव कैसे मजबूत होगी…? और एक मन से टूटा हुआ शिक्षक आने वाली पीढ़ी को स्थिरता और न्याय का मूल्य कैसे सिखा पाएगा..?