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DPI के नए आदेश से प्राचार्य ई-संवर्ग की पदोन्नति प्रक्रिया को मिली नई दिशा, विभाग की गति और गुणवत्ता को संतुलित रखना चाहते हैं शिक्षा मंत्री

रायपुर (मनीष जायसवाल)। नवा रायपुर से जारी हुए लोक शिक्षण संचालनालय के ताजा आदेश ने प्राचार्य ई-संवर्ग की पदोन्नति प्रक्रिया को एक नया ठहराव और नई दिशा दी है..। 17 नवंबर से शुरू होने वाली काउंसिलिंग को रोककर दावा-आपत्ति का समय देने के इस निर्णय का शिक्षक समाज में स्वागत किया जा रहा है।

बताते चले कि कई पदोन्नत प्राचार्यो ने काउंसिलिंग के पूर्व अपने पक्ष रखने के लिए समय मांगा था। यदि उनकी बात सुने बिना प्रक्रिया आगे बढ़ती, तो मामला अदालत के चक्कर लगा सकता था। लेकिन विभाग ने इस बार सावधानी का वह रास्ता चुना है जिसमें पहले गलती को पहचान कर सुधारा जाता है। अब 17 से 19 नवंबर तक दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई है और उसके निराकरण के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है। यह समिति 21 नवंबर को अपनी रिपोर्ट देगी और इसके बाद काउंसिलिंग की नई तारीख जारी की जाएगी..। यह पूरी प्रक्रिया संकेत देती है कि विभाग अब फैसलों को गहराई से छानकर आगे बढ़ने को प्राथमिकता देता हुआ दिख रहा है..। जैसे कोई तीरंदाज तीर छोड़ने से पहले लक्ष्य को दो बार देखता है..।

इस बदलाव के केंद्र में एक नाम लगातार उभर रहा है वह है स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव का, विभाग में उनकी कार्यशैली अमल में आते ही प्रशासन की चाल में स्पष्ट सुधार की शुरुआत हो गई है..। उनका तरीका ऐसा लगता है जैसे कोई माली पहले पौधों के इर्द-गिर्द जमा सूखी पत्तियों को हटा दे, फिर पानी डाले ताकि पौधा सिर्फ बढ़े नहीं, बल्कि सही दिशा में बढ़े। दावा-आपत्ति के लिए काउंसिलिंग स्थगित करने का कदम भी उसी सोच का विस्तार है, जहां जल्द बाजी पर नहीं, बल्कि सही निर्णय लेने पर बल दिया जाता है..।

शिक्षक भी इस बदलाव को महसूस कर रहे हैं। यह धारणा मजबूत हो रही है कि विभाग अब दुरुस्त आए की तर्ज पर काम कर रहा है..। जहां गलतियों से बचना भी एक कामयाबी माना जाता है। कई विषयों पर मंत्री श्री यादव की शैली संकेत तो दे रही है कि वे विभाग को केवल चलाना नहीं चाहते, बल्कि उसकी गति और गुणवत्ता दोनों को संतुलित रखना चाहते है।

यदि दावा-आपत्तियों की अनदेखी होती, तो प्राचार्य पदोन्नति प्रक्रिया एक बार फिर न्यायालयी विवाद में फंस सकती थी। लेकिन इस बार विभाग ने समस्या को उसके जन्म लेने से पहले ही समझ लिया । यह वही दूरगामी समझ है जिसकी वर्षो से प्रतीक्षा थी..।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव का यह कदम सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नही असल में कार्य संस्कृति में बदलाव का स्पष्ट संकेत है। वे समस्याओं को ढंक कर नहीं, बल्कि पकड़कर खत्म करने की प्रवृत्ति ला रहे है। जैसे कोई शिक्षक कठिन पाठ को सरल उदाहरण देकर हमेशा के लिए समझा दे..।

समग्र रूप से देखें तो यह निर्णय पदोन्नति प्रक्रिया को पारदर्शी और संतुलित बनाने की दिशा में एक अच्छी शुरुआत है। उम्मीद है कि विभाग की यह सुधारात्मक गति आगे भी बनी रहे, क्योंकि सही दिशा में उठाया गया छोटा कदम भी भविष्य की बड़ी स्थिरता का आधार बन सकता है..।

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