रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान के समर्थन मूल्य को लेकर खरीदी से पहले सियासत गरमाने लगी है। आरएसएस की अनुषांगिक संगठनों में से एक भारतीय किसान संघ की हुंकार और प्रदर्शन ने राज्य सरकार की मुसबित बढ़ा दी है।भारतीय किसान संघ अन्नदाता किसानों के साथ खड़ा नजर आ रहा है। समर्थन मूल्य और बकाया बोनस के मुद्दे पर समझौते के मूड में भी पदाधिकारी दिखाई नहीं दे रहे हैं। कवर्धा से जिस अंदाज में अंदोलन की शुरुआत हुई और प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों के बाद राजधानी रायपुर में किसान संघ के बैनर तले हजारों की संख्या में जुटे किसानों की मांग ने राज्य सरकार के सिपहसालारों और प्रदेश भाजपा के रणनीतिकारों की परेशानी बढ़ा दी है।

भारतीय किसान संघ के इस प्रभावी आंदोलन और किसानों के साथ खड़े रहने की रणनीति के बाद अब प्रदेश की सियासत धान खरीदी और समर्थन मूल्य के मुद्दे पर पूरी तरह गरमा गई है। भारतीय किसान संघ की मांग के बाद, किसानों के मुद्दे और समर्थन मूल्य की मांग पर कांग्रेस कूद गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने धान खरीदी को लेकर भाजपा सरकार पर किसानों से वादा खिलाफी का आरोप लगाया है। सरकार किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल में धान खरीदेगी।

पीसीसी अध्यक्ष बैज ने मांग है कि किसानों को धान का 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से एकमुश्त भुगतान किया जाए। बैज ने कहा, भाजपा ने 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी का वादा किया था। अब आदान सहायता की गणना प्रति एकड़ के आधार पर करने से किसानों को मिलने वाली राशि प्रभावित हो सकती है।

आदान सहायता घटाने का लगाया आरोप

पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज के अनुसार, वर्ष 2023-24 में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP 2183 रुपये प्रति क्विंटल था और राज्य सरकार 917 रुपये आदान सहायता देती थी। वर्ष 2024-25 में MSP 2300 रुपये होने पर सहायता 800 रुपये, 2025-26 में MSP 2369 रुपये होने पर 731 रुपये और 2026-27 में MSP 2441 रुपये होने पर सहायता 659 रुपये प्रति क्विंटल रह गई। उन्होंने दावा किया कि सहायता में कुल 258 रुपये की कमी हुई है। कांग्रेस ने MSP वृद्धि जोड़कर 3358 रुपये भुगतान की मांग की है। उन्होंने दीपावली से पहले किसानों को अग्रिम भुगतान और 6066 करोड़ रुपये की बकाया राशि देने की भी मांग की।

ये है भारतीय किसान संघ की प्रमुख मांगे

भारतीय किसान संघ द्वारा गौवंदन योजना पर प्रस्ताव (संलग्न) पारित किया गया है, उसे प्रदेश में लागू किया जाए एवं जी-राम-जी योजना को गौ संरक्षण एवं गौ संवर्धन से जोड़ा जाए।

धान खरीदी की 2022-23 की किसानों की रुकी हुई ₹1700 करोड़ की राशि किसानों को तत्काल प्रदान की जाए।

खेती की लागत लगातार बढ़ती ही जा रही है। केन्द्र सरकार ने इस आधार पर प्रतिवर्ष धान के समर्थन मूल्य में वृद्धि भी की है। परन्तु राज्य सरकार ने यह लाभ किसानों को हस्तान्तरित न करते हुये धान के खरीदी मूल्य में पिछले 3 वर्षों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिसके कारण किसानों की आय बढ़ने की बजाय घटती जा रही है। अतः केन्द्र सरकार द्वारा पिछले 3 वर्षों में की गयी₹258 (117+69+72) की वृद्धि का लाभ किसानों को देते हुये ₹3358 में धान खरीदी की जाय। सब्जी एवं फलों की खेती करने वाले किसानों को भी कृषक उन्नति योजना में जोड़ा जाए।

धान खरीदी 15 नवंबर से 15 फरवरी तक की जाए। किसानों के साथ अन्याय न हो इसलिये धान खरीदी में प्रति तौल अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम लेने का शासन की ओर से आदेश भी जारी किया जाए। यह चिन्तनीय है कि माननीय श्री गजेन्द्र यादव जी, कैबिनेट मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, द्वारा 13 अक्टूबर 2025 को भारतीय किसान संघ के मंच से हजारों किसानों और प्रेस के समक्ष घोषणा करने के बाद भी इसका आदेश जारी नहीं किया गया है।

हाल ही में आयी हुई बाढ़ के कारण पूरे प्रदेश में किसानों की फसलों की भारी हानि हुई है। शासन तत्काल सर्वे कर किसानों की क्षतिपूर्ति की उचित व्यवस्था करे।

धान खरीदी में टोकन व्यवस्था में सुधार किया जाए। बड़े किसानों को पांच टोकन एवं लघु एवं सीमांत किसानों को क्रमशः तीन व दो टोकन दिया जाए। धान खरीदी के समय अनावश्यक दबाव डालकर खाता समर्पण कराने की प्रक्रिया बंद की जाए।

प्रदेश के चारों शक्कर कारखानों में गन्ना किसानों के समयबद्ध, नियमित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए 300 करोड़ का एक रिवोलविंग फण्ड कारखानों को दिया जाय। शक्कर कारखानों को नुकसान से बचाने, घाटे से निकालने तथा गन्ना किसानों को त्वरित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा शक्कर कारखानों से ख़रीदे जाने वाले शक्कर का मूल्य 5500 रू प्रति क्विंटल निर्धारित किया जाय।

अरपा भैंसाझार, पैरी हाईडैम, हसदेव बांगो दाया तट, कुम्हारी जलाशय, सुतियापाट, बकेला, करियाआमा, घोघरा आदि पुरानी व नई परियोजनाओं को स्वीकृति देकर कार्य प्रारंभ करना चाहिए।

बाजार में अधिक मूल्य पर खाद विक्रय करने पर रोक लगाई जाए एवं ऐसे विक्रेताओं पर कड़ी कारवाई की जाए।

भूमि अधिग्रहण में भारतीय किसान संघ के आयाम भारतीय एग्रो इकोनोमिक रिसर्च सेंटर द्वारा जारी किये गये उदयपुर डिक्लेरेशन (संलग्न) के अनुसार कार्य किया जाए।

रबी में जल संरक्षण की दृष्टि से धान उत्पादन को हतोत्साहित करने के लिये और वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के लिये मक्के और गेहूं की भी खरीदी समर्थन मूल्य पर की जाय।