CG Bilaspur High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर जिले के सेंदरी गांव में 21.92 एकड़ जमीन पर उगाई गई धान की फसल को समर्थन मूल्य पर सहकारी समिति में बेचने की अनुमति मांगने वाली दो याचिकाकर्ताओं की याचिका को छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई काेर्ट के जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा है, निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करने योग्य कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।

याचिकाकर्ता कमलेश सिंह और अभिनव सिंह ने जिला न्यायालय के 25 सितंबर 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे वर्ष 1998 से विवादित जमीन पर काबिज हैं और खेती कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2016 में जमीन के मालिक पक्ष के साथ पूरी जमीन पांच लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से खरीदने का मौखिक समझौता हुआ था। इसके लिए 50 लाख रुपये अग्रिम देने की बात भी कही गई। बिक्री विलेख निष्पादित नहीं होने पर उन्होंने अनुबंध के पालन के लिए दीवानी मुकदमा दायर किया है।

पढ़िए क्या है मामला?

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि निचली अदालत ने 16 अप्रैल 2024 को जमीन बेचने पर रोक दी है। जमीन पर खेती करने के बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में नाम नहीं होने से उन्हें धान बेचने और उचित मूल्य पाने में परेशानी हो रही है। उन्होंने सरकारी नियमों के तहत धान बेचने की अनुमति मांगी थी।

भूमि स्वामी की ओर से आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा, याचिकाकर्ता न तो जमीन के मालिक हैं और न ही सरकारी पोर्टल एग्री स्टैक पर उनके नाम से पंजीयन है। सरकारी योजना के तहत धान बेचने की अनुमति उन्हीं किसानों को है, जिनके नाम राजस्व रिकॉर्ड और पोर्टल में दर्ज हैं।

पढ़िए हाई कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?

याचिका की सुनवाई जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने पाया कि जमीन के स्वामित्व को लेकर दीवानी मुकदमा अभी विचाराधीन है। निचली अदालत ने संबंधित पक्षों की आपत्तियों और सरकारी योजना की शर्तों पर विचार करने के बाद अनुमति देने से इनकार किया था। कोर्ट ने कहा, निचली अदालत के आदेश में कोई अधिकार क्षेत्र संबंधी त्रुटि, अवैधता या गंभीर खामी नहीं मिली। इस टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है।