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छत्तीसगढ़ शिक्षक पदोन्नति विवाद: स्कूल शिक्षा सचिव और DPI को नोटिस; बिना TET प्रमोशन देने पर अदालत की अवमानना की चेतावनी

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की पदोन्नति (Promotion) का मामला अब कानूनी पेचीदगियों में उलझता नजर आ रहा है। एक तरफ जहां विभाग डेटा जुटाने में लगा है, वहीं दूसरी ओर हाई कोर्ट के अधिवक्ता ने लीगल नोटिस जारी कर सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाया है।

Cg news।रायपुर: छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के घेरे में है। हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद देवांगन ने स्कूल शिक्षा सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को एक कड़ा लीगल नोटिस भेजा है।इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए मांग की गई है कि बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास किए किसी भी शिक्षक को पदोन्नति न दी जाए।

​अधिवक्ता गोविंद देवांगन ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि Supreme Court of India ने 1 सितंबर 2025 को अपने आदेश में देशभर के सभी शिक्षकों के लिए TET पास होना अनिवार्य कर दिया है।

नोटिस में आरोप लगाया गया है कि छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग इस आदेश की अनदेखी कर रहा है और उन शिक्षकों को भी प्रमोशन दे रहा है जिन्होंने यह पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।

दुर्ग और बस्तर संभाग के आदेशों पर कड़ा ऐतराज

​लीगल नोटिस में विशेष रूप से दुर्ग और बस्तर संभाग में हाल ही में जारी किए गए पदोन्नति आदेशों का उल्लेख किया गया है। अधिवक्ता का तर्क है कि:

  • ​गैर-टीईटी शिक्षकों को प्रमोशन देना योग्य और पात्रताधारी शिक्षकों के अधिकारों का हनन है।
  • ​यह प्रक्रिया सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना और नियमों के विरुद्ध है।
  • ​विभाग को पदोन्नति से पहले केवल टीईटी पास शिक्षकों का ही डेटा तैयार करना चाहिए था।

​अधिवक्ता का कहना है कि बिना मापदंड पूरे किए पदोन्नति देने से पूरे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

उनके अनुसार, यह कदम योग्यताधारी शिक्षकों को अनावश्यक रूप से कानूनी लड़ाई में धकेलने जैसा है। उन्होंने मांग की है कि विभाग को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करना चाहिए।

अवमानना याचिका की चेतावनी

​नोटिस में सरकार और विभाग को कड़ी चेतावनी दी गई है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी करते हुए पदोन्नति की प्रक्रिया जारी रखी गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ ‘कन्टेम्प्ट ऑफ कोर्ट’ (अदालत की अवमानना) की याचिका दायर की जाएगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग की होगी।

अब आगे क्या?

​इस लीगल नोटिस ने प्रदेश के शिक्षकों के बीच चल रही बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर छत्तीसगढ़ संयुक्त शिक्षक संघ जैसे संगठन 80 हजार शिक्षकों के भविष्य को देखते हुए टीईटी अनिवार्यता का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कानूनी नोटिस ने विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब देखना होगा कि शासन इस कानूनी नोटिस पर क्या जवाब देता है और क्या दुर्ग-बस्तर संभाग की पदोन्नति सूचियों में बदलाव किया जाएगा।

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