बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस बिभू दत्त गुरु की पीठ ने उन्हें सशर्त नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो स्थानीय जमानतदारों की शर्त रखी है। इसके साथ ही पासपोर्ट जमा कराने और जांच एवं ट्रायल की प्रक्रिया में पूरा सहयोग करने सहित कई शर्तें भी लगाई हैं।

रामगोपाल अग्रवाल की ओर से जेल से हाईकोर्ट में जमानत याचिका पेश की गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन का मामला मुख्य रूप से दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित प्रतीत होता है, जो पहले से ही जांच एजेंसी के कब्जे में हैं। आवेदक से किसी तरह की बरामदगी लंबित नहीं बताई गई है। साथ ही एफआईआर में उनके खिलाफ किसी विशिष्ट प्रत्यक्ष कृत्य का उल्लेख भी नहीं है।

अदालत ने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा कि मामले के अधिकांश सह-आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से नियमित अथवा अग्रिम जमानत मिल चुकी है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्हें मामले में मुख्य आरोपी बताया गया है। ऐसे में समानता के सिद्धांत (पैरिटी) को भी जमानत देने के पक्ष में एक महत्वपूर्ण आधार माना गया।

हाईकोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि रामगोपाल अग्रवाल 17 जुलाई 2026 से न्यायिक हिरासत में हैं। मामले में बड़ी संख्या में गवाहों और व्यापक दस्तावेजी साक्ष्यों के कारण सुनवाई पूरी होने में पर्याप्त समय लगने की संभावना है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

ये रहेंगी जमानत की शर्तें

अदालत ने एक लाख रुपये का निजी मुचलका और समान राशि के दो स्थानीय जमानतदार प्रस्तुत करने को कहा है, जिनकी संतुष्टि ट्रायल कोर्ट को करनी होगी। इसके अलावा पासपोर्ट जमा कराने, ट्रायल की कार्यवाही में सहयोग करने और मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लालच, धमकी अथवा किसी तरह का प्रलोभन नहीं देने की शर्त रखी गई है। जमानत पर रहने के दौरान किसी नए अपराध में शामिल नहीं होने और निवास का पता अथवा मोबाइल नंबर बदलने पर शपथपत्र के माध्यम से संबंधित अदालत को जानकारी देने का निर्देश भी दिया गया है।

ट्रायल कोर्ट परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त शर्तें भी लगा सकेगा। जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर अभियोजन पक्ष को जमानत निरस्त करने के लिए आवेदन प्रस्तुत करने का अधिकार रहेगा।

क्या है मामला

ईओडब्ल्यू और एसीबी ने एफआईआर रामगोपाल अग्रवाल को शराब घोटाला सिंडिकेट से जुड़ा सह-आरोपी बनाया था। यह एफआईआर 17 जनवरी 2024 को दर्ज की गई थी। अभियोजन के मुताबिक, 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ में शराब के निर्माण और बिक्री की व्यवस्था में कथित गड़बड़ियां की गईं। आरोप है कि शराब आपूर्ति प्रणाली में हेरफेर कर अवैध कमाई की गई और इस रकम का कथित सिंडिकेट के सदस्यों के बीच बंटवारा हुआ।

इस मामले में रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 12 के तहत अपराध दर्ज हैं। हाईकोर्ट के ताजा आदेश से उन्हें फिलहाल जेल से बाहर आकर मुकदमे की पैरवी करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, मामले में आरोपों का अंतिम निराकरण ट्रायल के दौरान ही होगा।