दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आशुतोष गढ़े ने बताया कि पूर्व सेवा से पेंशन देने माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय, पंजाब, हिमांचल, गुजरात, मध्यप्रदेश एवं अन्य राज्यों के उच्च न्यायालयों से पारित निर्णय का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एस. एल. पी दायर किया गया है, दीपावली के बाद सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता आशुतोष गढ़े से छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बस्तर संभाग प्रभारी प्रवीण श्रीवास्तव, जगदलपुर जिला अध्यक्ष लुदरसन कश्यप ने दिल्ली में उनसे मुलाकात किया, तथा पेंशन याचिका के संबंध में चर्चा किया, आगे पूर्व सेवा की गणना हेतु पुरजोर प्रयास करने का निर्णय लिया गया साथ ही पूर्व सेवा के आधार पर पेंशन लेने वाले साथियो से सहयोग करने कहा है।

शिक्षा कर्मी के सेवा को शून्य नहीं किया जा सकता, उच्च न्यायालय बिलासपुर ने दिया था पेंशन के लिए नीति बनाने का निर्णय, किन्तु शासन गंभीर नही है।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि उन्होंने दशकों तक निरंतर सेवा दी है और पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली के बाद उनकी पिछली सेवाओं को पेंशन के लिए ‘अर्हता सेवा’ (Qualifying Service) के रूप में गिना जाना चाहिए। मध्यप्रदेश के 1962 – 63 के आदेश एवं सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए पक्ष रखा था

उच्च न्यायालय बिलासपुर ने स्पष्ट किया है कि पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि एक कल्याणकारी उपाय और स्थगित वेतन (Deferred Compensation) है। याचिकाकर्ताओं द्वारा संविलियन (01.07.2018) से पूर्व दी गई लंबी सेवा को अप्रासंगिक मानकर शून्य नहीं किया जा सकता।

माननीय न्यायालय ने निर्देश दिया है कि शासन सेवा की निरंतरता, कार्य की प्रकृति, प्रशासनिक नियंत्रण और संवैधानिक सिद्धांतों (भेदभाव-निषेध और समानुपातिकता) को ध्यान में रखते हुए 120 दिनों के भीतर एक सचेत और कारणयुक्त आदेश (Speaking Order) जारी करे।

माननीय न्यायालय के अनुसार, यदि केवल संविलियन तिथि से 10 वर्ष की गणना की जाती है, तो शिक्षक वर्ष 2028 के बाद ही पात्र हो पाएंगे, जबकि वे पहले ही राज्य के नियंत्रण में एक दशक से अधिक सेवा दे चुके हैं। यह न्यायसंगतता, अनुपातिकता और प्रशासनिक तर्कसंगतता के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि माननीय हाई कोर्ट छत्तीसगढ़ ने छत्तीसगढ़ शासन को पूरी सुनवाई के बाद इस सभी विषय के आधार पर पालिसी बनाने कहा था।

किंतु शासन ने पॉलिसी नही बनाया और अपने पूर्व के आदेश के आधार पर याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन को अमान्य कर दिया यह विधिसंगत नही है और यह शिक्षको के लिए अत्यंत आपत्तिजनक है

हाई कोर्ट ने पूर्व के सेवा के आधार पर संविलियन करते हुए शिक्षको को शासकीय किया और अब वही प्रथम पूर्व सेवा पेंशन के लिए अमान्य किया गया है, यह पूर्णतया गलत है।

शिक्षा कर्मी के पद पर किए गए पिछली सेवाओं को पेंशन के लिए ‘अर्हता सेवा’ (Qualifying Service) के रूप में मान्य किए जाने को लेकर छत्तीसगढ़ के शिक्षकों द्वारा रामलाल डड़सेना एवं अन्य वर्सेस छत्तीसगढ़ शासन का याचिका सुप्रीम कोर्ट मे दायर किया गया है।