बिलासपुर। नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद सिरगिट्टी का वार्ड क्रमांक-10 इन दिनों शहरी नियोजन की विफलता का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। शहर के सकरी, उसलापुर, मंगला, मोपका समेत कई इलाकों में जहां अवैध निर्माण और प्लॉटिंग पर समय-समय पर निगम का बुलडोजर और कानूनी कार्रवाई देखने को मिलती है, वहीं सिरगिट्टी में कथित अवैध बसाहटें और प्लॉटिंग बेखौफ जारी रहने से दोहरे मापदंड के आरोप लगने लगे हैं।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वार्ड में महावीर कॉलोनी, भार्गव वाटिका, एनविल कॉलोनी, चित्रकूट समेत कई नई बसाहटें तेजी से विकसित हुईं, लेकिन इनमें से अनेक क्षेत्रों की वैधानिक स्थिति आज भी स्पष्ट नहीं है। इसके बावजूद कुछ स्थानों पर निगम निधि से सड़क और अन्य विकास कार्य कराए जाने को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

शहर में नियमों का जाल, सिरगिट्टी में खुली छूट?

नगर निगम क्षेत्र में सामान्य नागरिक को मकान निर्माण के लिए पहले भूमि डायवर्सन, टीएनसी स्वीकृति, भवन नक्शा अनुमोदन, विकास शुल्क, संपत्ति कर और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। नियमों का पालन नहीं होने पर नोटिस, जुर्माना और कार्रवाई का भी सामना करना पड़ता है।

लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि सिरगिट्टी के कई हिस्सों में बिना पर्याप्त वैधानिक प्रक्रियाओं के बसाहटें विकसित हो रही हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि अन्य क्षेत्रों में कानून सख्ती से लागू होता है तो वार्ड-10 में अलग व्यवस्था क्यों दिखाई देती है?

निगम निधि के उपयोग पर उठ रहे गंभीर प्रश्न

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ ऐसी बसाहटों में भी सड़क और अन्य मूलभूत कार्य कराए गए हैं, जिन्हें अभी तक विधिवत रूप से नगर निगम को हस्तांतरित नहीं किया गया। नियमानुसार निजी कॉलोनियों के विकास और अधोसंरचना निर्माण की जिम्मेदारी प्रारंभिक चरण में डेवलपर की होती है।

यदि हस्तांतरण से पहले सार्वजनिक धन का उपयोग हुआ है, तो यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि संबंधित कार्य किस नियम और स्वीकृति के आधार पर किए गए।

कठघरे में स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अमला

क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग, अनियोजित बसाहट और कथित अतिक्रमण को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों, निगम अमले और राजस्व विभाग के निचले स्तर के अधिकारियों की निष्क्रियता अथवा कथित संरक्षण के कारण यह स्थिति बनी हुई है।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है, लेकिन लगातार उठ रही शिकायतों ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

बरसात में डूबता है इलाका, प्रशासन पर फूटता है गुस्सा

अनियोजित बसाहटों का सबसे बड़ा दुष्परिणाम हर वर्ष बरसात में सामने आता है। जलभराव, खराब सड़कें, अंधेरे में डूबे मोहल्ले और पेयजल संकट जैसी समस्याओं से जूझने के बाद स्थानीय लोग जिला प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं। जबकि शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि अव्यवस्थित विकास ही इन समस्याओं की मूल वजह है।

कलेक्टर की सख्ती बनाम जमीनी हकीकत

जिला प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अवैध कॉलोनियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों के विरुद्ध गतिविधियों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद यदि क्षेत्र में कथित तौर पर अवैध प्लॉटिंग और बसाहट जारी है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर कलेक्टर के निर्देशों का पालन जमीनी स्तर पर क्यों नहीं हो रहा?

सबसे बड़ा सवाल

क्या सिरगिट्टी वार्ड-10 में नगर नियोजन के नियमों को व्यवस्थित रूप से नजरअंदाज किया जा रहा है? और यदि ऐसा है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी—जनप्रतिनिधियों की, निगम प्रशासन की, राजस्व विभाग की या पूरे सिस्टम की?