बलरामपुर (पृथ्वी लाल केशरी)… पंचायत सचिवों की भर्ती और स्थानांतरण को लेकर जिला पंचायत से जारी सूची अब विवादों में घिर गई है। सूची में अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के लिए पदों की संख्या शून्य दर्शाए जाने के बाद समाज के लोगों, ग्रामीणों और युवाओं में नाराजगी बढ़ गई है। लोगों का सवाल है कि यदि आरक्षण रोस्टर के तहत एससी वर्ग के लिए पद निर्धारित होना था, तो जारी सूची में उसका उल्लेख शून्य क्यों किया गया।

जिला पंचायत सीईओ कार्यालय से जारी सूची सामने आने के बाद अनुसूचित जाति समाज के प्रतिनिधियों ने इसे गंभीर मामला बताया है। उनका कहना है कि भर्ती और पदस्थापना में आरक्षण रोस्टर का पालन होना चाहिए। ऐसे में किसी वर्ग के लिए पदों की संख्या शून्य दर्शाए जाने की स्थिति को स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

समाज के लोगों का तर्क है कि जिले में आरक्षण की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार पदों का वर्गवार निर्धारण किया जाना चाहिए। यदि रोस्टर के हिसाब से एससी वर्ग के लिए पद बनता है और सूची में उसे शून्य दर्शाया गया है, तो यह सामान्य प्रशासनिक त्रुटि भर नहीं मानी जा सकती। वहीं यदि नियमों के अनुसार इस वर्ग के लिए पद शून्य ही बनता है, तो प्रशासन को उसका आधार और रोस्टर की स्थिति सार्वजनिक कर स्पष्ट करना चाहिए।

सूची जारी होने के बाद से ही इस मामले को लेकर ग्रामीणों और युवाओं में असंतोष है। सोशल मीडिया के साथ ज्ञापन के जरिए भी प्रशासन का ध्यान इस ओर खींचा जा रहा है। लोगों ने सूची की दोबारा समीक्षा करने और आरक्षण रोस्टर के आधार पर वर्गवार पदों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

जांच और जवाबदेही की मांग

समाज के प्रतिनिधियों ने कहा है कि यदि सूची तैयार करने में नियमों की अनदेखी या किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और आवश्यकता पड़ने पर संशोधित सूची जारी करने की मांग की है। कुछ प्रतिनिधियों ने मांग पूरी नहीं होने पर उच्च अधिकारियों से शिकायत और आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

मामले को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एससी वर्ग के पद शून्य दिखाने के पीछे कौन-सा आरक्षण रोस्टर लागू किया गया और सूची तैयार करते समय उसका आधार क्या रहा। यदि यह केवल प्रशासनिक चूक है तो उसका सुधार होना चाहिए, और यदि नियमों के अनुरूप पद शून्य निर्धारित हुआ है तो प्रशासन को इसकी वजह स्पष्ट करनी होगी। फिलहाल जिला प्रशासन या जिला पंचायत सीईओ कार्यालय की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।