रामानुजगंज (पृथ्वी लाल केशरी)… किसानों की फसल को तालाब के ओवरफ्लो पानी से बचाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई नाली पहली ही तेज बारिश में धराशायी हो गई। नाली टूटने के बाद तालाब का पानी खेतों की ओर बहने लगा है और तैयार फसल पर संकट मंडरा रहा है। जिस निर्माण का मकसद किसानों को पानी से बचाना था, वही निर्माण अब किसानों के लिए मुसीबत बन गया है। ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है।

मामला जनपद पंचायत रामचंद्रपुर के ग्राम पंचायत पिपरौल का है। ग्रामीणों के अनुसार नाली का निर्माण बारिश शुरू होने से ठीक पहले कराया गया था। पहली तेज बारिश होते ही नाली का बड़ा हिस्सा टूटकर बह गया। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में गुणवत्ता के निर्धारित मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि नाली में सरिया का इस्तेमाल नहीं किया गया और सीमेंट-रेत के मिश्रण को लेकर भी मानकों की अनदेखी की गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य बद्री यादव के माध्यम से कराया गया। उनका कहना है कि यदि लाखों रुपये की लागत से बनी संरचना पहली बारिश में ही टिक नहीं पाई तो निर्माण की गुणवत्ता और उस पर खर्च हुई राशि की जांच जरूरी है। ग्रामीणों ने निर्माण से संबंधित स्वीकृति, लागत, कार्य एजेंसी और तकनीकी मानकों की भी जांच कराने की मांग की है।

फसल बचाने की योजना.. किसानों के लिए संकट

नाली टूटने के बाद तालाब का पानी सीधे खेतों की ओर पहुंच रहा है। इससे तैयार फसल के प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस समस्या के समाधान के लिए सरकारी राशि खर्च की गई, निर्माण के कमजोर पड़ते ही वही समस्या फिर किसानों के सामने खड़ी हो गई है।

ग्रामीणों ने पूरे निर्माण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने, कार्य की गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों से सरकारी राशि की वसूली तथा नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

मंत्री के क्षेत्र में विकास की रकम, जमीन सवाल

रामानुजगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक और कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम लगातार क्षेत्र में किसानों और ग्रामीणों की सुविधाओं के लिए विकास कार्यों के लिए राशि उपलब्ध कराने की बात करते रहे हैं। ऐसे में उनके विधानसभा क्षेत्र में किसानों को पानी से बचाने के लिए बनाई गई नाली का पहली बारिश में ही टूट जाना स्थानीय स्तर पर निर्माण व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार स्तर पर किसानों के लिए राशि और योजनाएं उपलब्ध कराए जाने के बावजूद यदि निर्माण कार्य की गुणवत्ता जमीन पर टिक नहीं पाती, तो उसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता जांच में लापरवाही की वजह से ऐसी स्थिति बनी है।

अब सवाल सिर्फ नाली के टूटने का नहीं है। सवाल यह है कि लाखों रुपये की लागत से बनी नाली पहली बारिश में ही क्यों टूट गई, निर्माण की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई और यदि मानकों का पालन नहीं हुआ तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है। इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर है। यदि निर्माण में तकनीकी या वित्तीय अनियमितता मिलती है तो यह मामला केवल एक नाली के टूटने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी राशि से कराए जा रहे विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।