बिलासपुर…कभी-कभी समय ऐसे दृश्य रच देता है, जो राजनीति, पद और सत्ता से कहीं ऊपर होते हैं। शनिवार को मिनोचा कॉलोनी में ऐसा ही एक दृश्य रचा गया—जहां भाषण नहीं थे, आरोप नहीं थे, सत्ता का अहंकार नहीं था। वहां थी तो सिर्फ भक्ति, भावना और मानवता।

श्री प्रेम सेवा परिवार द्वारा आयोजित विश्वविख्यात कथा वाचक जया किशोरी की नानी बाई का मायरा कथा ने ऐसा वातावरण बना दिया, जिसमें राजनीति की कठोर रेखाएं स्वतः मिटती चली गईं।

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जहां विपक्ष भी अपना लगा, सत्ता भी साधक बनी

कथा पंडाल में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, सुशांत शुक्ला, अटल श्रीवास्तव, पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव, पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एक साथ बैठे दिखे।

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राजनीतिक मंचों पर जहां यही चेहरे एक-दूसरे पर तीखे वार करते हैं, वहीं यहां कृष्ण कथा के संसार में सब एक समान साधक नजर आए। न कोई पक्ष, न विपक्ष—
बस श्रोता और श्रद्धालु।

नरसी मेहता की टूटी गाड़ी और अडिग भक्ति

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जया किशोरी ने नानी बाई के मायरे की कथा में बताया कि कैसे निर्धन नरसी मेहता को मायरे का निमंत्रण मिला, लेकिन उनके पास देने को कुछ भी नहीं था। टूटी बैलगाड़ी, एक पोटली, एक तुंबा—और समाज का तिरस्कार। लोग दूर होते चले गए, गाड़ी टूट गई, बैलों को चोट लगी…लेकिन नरसी मेहता नहीं डिगे। जब मनुष्य टूटता है, तभी भगवान उसे संभालते हैं” — यह भाव कथा के हर शब्द में झलकता रहा।

भक्ति पलायन नहीं, संघर्ष का नाम है

कथा के दौरान जया किशोरी ने बेहद सख़्त लेकिन जीवन-सत्य से भरे शब्दों में कहा—“भक्ति का अर्थ यह नहीं कि आप मेहनत छोड़ दें। पढ़ाई करनी होगी, काम करना होगा। भगवान परीक्षा में पेपर लिखने नहीं आते।” उन्होंने कुंडली और राजयोग पर कटाक्ष करते हुए कहा—राजयोग लिखा होना काफी नहीं, परिस्थितियों से टकराने की हिम्मत होगी तभी वह योग जागेगा। यह संदेश सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों के लिए भी था।

अंधेरे में भी नहीं बुझी आस्था

एक समय बिजली गुल हो गई। पंडाल अंधेरे में डूब गया।
लेकिन श्रद्धा नहीं डूबी। मोबाइल की रोशनी जली, भजन गूंजे और पूरा पंडाल कृष्ण नाम में झूम उठा। यह दृश्य अपने आप में बताने के लिए काफी था कि आस्था को बिजली की जरूरत नहीं होती।

जब कथा ने राजनीति को मौन कर दिया ।इस पूरे आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि कोई नेता नेता नहीं लगा, कोई विपक्षी नहीं दिखा, कोई भाषण नहीं हुआ।
सिर्फ कथा थी—और कथा का असर। जया किशोरी की वाणी ने यह साबित कर दिया कि धर्म अगर सही हाथों में हो, तो वह समाज को जोड़ता है, तोड़ता नहीं।

आज अंतिम दिन, मायरा भरने का विशेष प्रसंग

श्री प्रेम सेवा परिवार ने जानकारी दी कि आज मायरा भरने का विशेष वर्णन होगा। महिलाओं से पीले और लाल वस्त्र धारण कर दोपहर 2:30 बजे से पहले कथा स्थल पहुंचने की अपील की गई है।