बिलासपुर…, अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़े चढ़ावे की चोरी की घटना से आहत रामभक्तों की भावनाओं को वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय केशरवानी ने श्रद्धा, सेवा और जनजागरण के विराट संकल्प में बदल दिया। उनके नेतृत्व में निकली तीन दिवसीय “श्रीराम श्रद्धा यात्रा” ने बिलासपुर शहर ही नहीं, बल्कि गांव-गांव और मोहल्ले-मोहल्ले में भगवान श्रीराम के प्रति आस्था की नई अलख जगाई। सोमवार को वर्षों देवी मंदिर परिसर में महाआरती, विशाल भंडारा और महाप्रसाद वितरण के साथ यात्रा का भव्य समापन हुआ। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने इस आयोजन को जनआस्था के महासैलाब में बदल दिया।

तीन दिनों तक बिलासपुर की सड़कों पर भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का ऐसा दृश्य नजर आया, जिसने पूरे शहर को राममय कर दिया। हाथों में श्रद्धा के नारियल, होठों पर “जय श्रीराम” का उद्घोष और मन में अपने भांचा श्रीराम के प्रति अटूट प्रेम लिए महिलाएं, युवा, बुजुर्ग और बच्चे बड़ी संख्या में यात्रा से जुड़े। यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं रही, बल्कि अयोध्या की पीड़ा को बिलासपुर की सामूहिक श्रद्धा से जोड़ने वाला जनभावनाओं का विराट अभियान बन गई।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय केशरवानी ने यात्रा को केवल शहर की सड़कों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने गांव-गांव और बस्ती-बस्ती पहुंचकर लोगों से संवाद किया, अयोध्या की घटना से जुड़ी रामभक्तों की वेदना साझा की और समाज को यह संदेश दिया कि भगवान श्रीराम केवल एक धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मर्यादा, विश्वास और लोकजीवन की आत्मा हैं। यात्रा के दौरान लोगों ने स्वस्फूर्त आगे बढ़कर श्रद्धा के नारियल अर्पित किए और अपने भांचा श्रीराम के प्रति प्रेम व सम्मान व्यक्त किया।

यात्रा का सबसे आकर्षक और भावनात्मक दृश्य वह रहा, जब विजय केशरवानी स्वयं भजन मंडली के साथ मृदंग की थाप पर श्रीराम के भजन गाते हुए आगे बढ़े। मृदंग की गूंज, भजनों की मधुर स्वर लहरियों और हजारों कंठों से उठते “जय श्रीराम” के उद्घोष ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। यात्रा जिस मार्ग से गुजरी, वहां श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया, आरती उतारी और भगवान श्रीराम के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की।

तीन दिनों तक यात्रा के अलग-अलग पड़ावों पर रामभक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने न केवल यात्रा में सहभागिता की, बल्कि इसे अपनी आस्था और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा अभियान मानकर आगे बढ़ाया। महिलाओं और मातृशक्ति की बड़ी भागीदारी ने यात्रा को विशेष ऊर्जा दी। युवाओं की मौजूदगी ने यह संदेश भी दिया कि भगवान श्रीराम के आदर्श और सनातन संस्कृति की चेतना नई पीढ़ी में भी उतनी ही जीवंत है।

यात्रा का समापन वर्षों देवी मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति के चरम वातावरण के बीच हुआ। यहां आयोजित महाआरती में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। दीपों की आभा, भजनों की स्वर लहरियों और “जय श्रीराम” के गगनभेदी उद्घोष से मंदिर परिसर देर तक गुंजायमान रहा। इसके बाद विशाल भंडारे और महाप्रसाद का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों लोगों ने एक साथ प्रसाद ग्रहण किया। सेवा, समरसता और सामाजिक एकता का यह दृश्य यात्रा के मूल उद्देश्य को साकार करता नजर आया।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और समर्पण के प्रतीक के रूप में बड़ी संख्या में नारियल अर्पित किए। इन नारियलों को अयोध्या धाम भेजकर भगवान श्रीराम के श्रीचरणों में समर्पित किया जाएगा। यह केवल नारियल का समर्पण नहीं होगा, बल्कि माता कौशल्या के मायके और छत्तीसगढ़ के ननिहाल की ओर से अपने भांचा श्रीराम के प्रति प्रेम, स्नेह, विश्वास और अटूट आस्था का भावपूर्ण संदेश होगा।

इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय केशरवानी ने कहा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़ी चोरी की घटना ने करोड़ों रामभक्तों की भावनाओं को गहरी पीड़ा पहुंचाई है। बिलासपुर ने उस पीड़ा को केवल शब्दों में व्यक्त नहीं किया, बल्कि श्रद्धा, सेवा और समर्पण के जनसंकल्प में बदल दिया। तीन दिनों तक जिस तरह शहर और गांवों के लोग यात्रा से जुड़े, वह भगवान श्रीराम के प्रति समाज की अटूट आस्था का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि “यह यात्रा किसी राजनीतिक प्रदर्शन या विरोध का माध्यम नहीं, बल्कि अपने भांचा श्रीराम के प्रति छत्तीसगढ़ के ननिहाल की श्रद्धा, सम्मान और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। श्रद्धालुओं ने जो नारियल अर्पित किए हैं, उनमें केवल श्रद्धा नहीं, बल्कि उनके मन का प्रेम, विश्वास और भगवान श्रीराम के प्रति समर्पण भी समाहित है। इन्हें अयोध्या में प्रभु श्रीराम के श्रीचरणों में समर्पित किया जाएगा।”

विजय केशरवानी ने कहा कि यात्रा का समापन भले ही हो गया हो, लेकिन भगवान श्रीराम के प्रति समाज की श्रद्धा और आस्था का यह संकल्प कभी समाप्त नहीं होगा। जब भी आस्था और जनभावनाओं को ठेस पहुंचेगी, समाज संयम, सेवा, श्रद्धा और एकजुटता के साथ अपनी भावनाएं व्यक्त करेगा। उन्होंने यात्रा में शामिल सभी रामभक्तों, मातृशक्ति, युवाओं, सामाजिक संगठनों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

तीन दिवसीय श्रीराम श्रद्धा यात्रा ने यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम केवल पूजनीय आराध्य नहीं, बल्कि ननिहाल के भांचा और जन-जन के आत्मीय हैं। विजय केशरवानी के संकल्प से निकली यह यात्रा आने वाले वर्षों में केवल एक धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि बिलासपुर की सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और भगवान श्रीराम के प्रति अटूट विश्वास के प्रतीक के रूप में याद की जाएगी।

यात्रा और विशाल भंडारे में विजय पांडेय, सिद्धांशु मिश्रा, विनोद साहू, संतोष गर्ग, ऋषि पांडेय, मनीष गढ़ेवाल, राजेश ताम्रकार, वीरू कसेर, अशोक शास्त्री, हितेश देवांगन, प्रभंजन बैसवाड़े, दिलीप जानू कौशिक, राजेंद्र वर्मा, उत्तरा सक्सेना, विकास लासकर, ध्रुव साहू, शीतल दास महंत, रामकुमार भोई, नीरज सोनी, अनिल यादव, देवेंद्र मिश्रा, अजय यादव और विक्की यादव सहित बड़ी संख्या में रामभक्त, मातृशक्ति, युवा, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि और श्रद्धालु शामिल हुए।