बिलासपुर… दीक्षांत समारोह में उपाधियां मिलती हैं, मेधावी विद्यार्थियों के गले में स्वर्ण पदक सजते हैं और वर्षों की मेहनत को सम्मान मिलता है। लेकिन शिक्षा का असली उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि उस ज्ञान से अपनी पहचान बनाना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। पंडित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय के सप्तम दीक्षांत समारोह में मंगलवार को राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका ने युवाओं को यही संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में अपना स्थान स्वयं बनाना पड़ता है। दूसरों की नकल अथवा तुलना करने के बजाय अपनी विशिष्टता पर विश्वास रखें। जीवन में ऐसा काम अवश्य करें, जिसका उद्देश्य केवल लेन-देन नहीं, बल्कि सकारात्मक परिवर्तन हो।

विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में राज्यपाल का संबोधन विद्यार्थियों के लिए केवल बधाई और शुभकामनाओं तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने शिक्षा के साथ जुड़ी जिम्मेदारियों, युवाओं के सामने मौजूद अवसरों और जीवन में सही दिशा चुनने की जरूरत पर भी बात की। उनका संदेश था कि असफलता से घबराने के बजाय उसके कारणों को समझें, गलतियों से सीखें और नए आत्मविश्वास के साथ फिर प्रयास करें। अपनी रुचि और क्षमता पहचानकर आगे बढ़ने वाले युवा ही जीवन में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।

बच्चों पर अपेक्षाएं न थोपें अभिभावक

राज्यपाल ने अभिभावकों को भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों पर अपनी अपेक्षाएं थोपने के बजाय उनकी रुचि और प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने में सहयोग करना चाहिए। हर बच्चे की अपनी क्षमता और विशिष्ट पहचान होती है। युवाओं को रोजगार और आजीविका के बदलते अवसरों को पहचानकर अपनी रुचि के क्षेत्र में पूरी मेहनत से आगे बढ़ना चाहिए। आत्मविश्वास, निरंतर प्रयास और अपनी प्रतिभा पर भरोसा ही सफलता का रास्ता तैयार करते हैं।

डिजिटल ज्ञान का माध्यम बनें, समय बर्बादी का नहीं

राज्यपाल ने इंटरनेट और डिजिटल तकनीक को ज्ञान तक पहुंच आसान बनाने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया। साथ ही इसके विवेकपूर्ण उपयोग की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को डिजिटल साधनों का इस्तेमाल अपनी विचारशक्ति और रचनात्मक क्षमता विकसित करने के लिए करना चाहिए। इनके अत्यधिक उपयोग से बचते हुए समय का सार्थक कार्यों में इस्तेमाल करना जरूरी है। जीवन में आंतरिक संतुष्टि, संतुलन और परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता भी महत्वपूर्ण है।

उनका संदेश व्यक्तिगत सफलता से आगे सामाजिक जिम्मेदारी तक पहुंचा। उन्होंने स्वच्छता बनाए रखने, पौधे लगाने और उनकी देखभाल जैसे छोटे-छोटे कार्यों को समाज में बदलाव की शुरुआत बताया। प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास से सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। शिक्षा का उपयोग केवल अपने भविष्य को संवारने के लिए नहीं, बल्कि समाज को बेहतर बनाने के लिए भी होना चाहिए।

24,800 शिक्षार्थियों की मेहनत को मिली पहचान

समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक सत्रों के कुल 24,800 सफल शिक्षार्थियों को उपाधि एवं प्रमाणपत्र प्रदान करने की घोषणा की गई। शिक्षा, प्रबंधन और भूगोल विषयों के पांच शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि प्रदान की गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले इन शिक्षार्थियों की उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इनमें ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के साथ कामकाजी वर्ग के विद्यार्थी भी शामिल हैं, जिनके लिए नियमित शिक्षा हासिल करना हमेशा आसान नहीं होता।

असफलता को चुनौती मानें युवा : अरुण साव

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज के उत्थान में करें। उन्होंने कहा कि पंडित सुन्दरलाल शर्मा के नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय उन लोगों के सपनों को साकार कर रहा है। युवाओं से असफलता को चुनौती के रूप में स्वीकार कर निरंतर प्रयास करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।

अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करें विद्यार्थी

दीक्षांत वक्ता हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए गुरुओं से प्राप्त ज्ञान को लेकर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भूमिका निभाने का अवसर है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि स्वाभिमानी, क्षमतावान और चरित्रवान युवा तैयार करना है, जिनकी जड़ें भारतीय संस्कृति और विचारों से जुड़ी हों।

राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के अध्यक्ष प्रो. नागेश्वर राव ने भी उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने जीवनपर्यंत सीखने की प्रवृत्ति विकसित करने, अपनी क्षमताओं को पहचानने और समाज तथा प्रदेश के विकास में योगदान देने की बात कही।

 विभूतियों का सम्मान

समारोह में शिक्षा, पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया। पंडित सुन्दरलाल शर्मा वनवासी गौरव सम्मान पुरुषोत्तम लाल उरांव और दामोदर कश्यप को प्रदान किया गया। उरांव को जनजातीय बच्चों की शिक्षा एवं सर्वांगीण विकास के लिए, जबकि कश्यप को बस्तर क्षेत्र में सामुदायिक सहभागिता से वन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए सम्मानित किया गया।

पंडित सुन्दरलाल शर्मा संस्कृति रत्न सम्मान लोकगायिका पद्मश्री डॉ. उषा बारले तथा रामनामी परंपरा के संरक्षण में योगदान देने वाली गुरुमाता सेतबाई रामनामी और गुलाराम रामनामी को प्रदान किया गया।

32 डिप्लोमा, 68 प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम और एआई सेंटर

कुलपति प्रो. वी.के. सारस्वत ने विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन किया गया है। कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए 32 डिप्लोमा तथा 68 प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम अनुमोदित किए गए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं उभरती तकनीकों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है। शोध गतिविधियों को मजबूत करने के लिए पंडित सुन्दरलाल शर्मा शोध पीठ की स्थापना भी की गई है।

विश्वविद्यालय को 12 नए ऑनलाइन पाठ्यक्रमों तथा एमएससी वनस्पति विज्ञान और एमएससी प्राणी विज्ञान के संचालन की स्वीकृति मिली है। विद्यार्थियों की सहायता के लिए एआई आधारित प्रवेश परामर्श सेवा और ऑनलाइन शिकायत निवारण व्यवस्था विकसित की गई है।

 बढ़ेंगी शोध और आधारभूत सुविधाएं

शोध एवं आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए पीएम-उषा योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय को 20 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। समारोह में विश्वविद्यालय की नई वेबसाइट, परीक्षा अभिलेख डिजिटलीकरण पोर्टल और पत्रिका ‘अभ्युदय’ का शुभारंभ किया गया। सामाजिक सरोकार के तहत एकलव्य विद्यालय देवपहरी के 311 विद्यार्थियों को बैग, स्वेटर, टिफिन और अन्य पाठ्य सामग्री वितरित की गई।

उपाधियों के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश

राज्यपाल रमेन डेका की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विधायक धरमलाल कौशिक एवं सुशांत शुक्ला, महापौर पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा, नैक अध्यक्ष प्रो. नागेश्वर राव और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वी.के. सारस्वत सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी और प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

सप्तम दीक्षांत समारोह में 24,800 शिक्षार्थियों की उपलब्धियों के साथ विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति और सामाजिक प्रतिबद्धता भी सामने आई। समारोह से निकलने वाले विद्यार्थियों के हाथों में उपाधियां थीं, लेकिन राज्यपाल का संदेश उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी भी सौंप रहा था- अपनी पहचान बनाइए, अपनी प्रतिभा को निखारिए और अपने ज्ञान से समाज में ऐसा बदलाव लाइए, जिस पर आने वाली पीढ़ियां गर्व कर सकें।