बस्तर (मनीष जायसवाल)  ।जिला मुख्यालय में गुरुवार को बस्तर संभाग के शिक्षकों का आक्रोश ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ा। संभागीय संयुक्त शिक्षा संचालक (जेडी) राकेश पांडे के कथित तानाशाही रवैए से नाराज सैकड़ों शिक्षकों ने संयुक्त रूप से मोर्चा खोलते हुए संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। नारों से गूंजते इस प्रदर्शन में शिक्षकों ने जेडी भगाओ, बस्तर बचाओ का नारा लगाकर साफ कर दिया कि अब सब्र का बांध टूट चुका है।

जगदलपुर के एक स्टेडियम में इकट्ठा हुए शिक्षकों का कहना था कि राकेश पांडे का निरीक्षण अब अपमान अभियान बन गया है। उनका आरोप है कि जेडी जहां भी निरीक्षण पर पहुंचते हैं, वहां स्कूल की दीवारों की धूल या सफाई को देखकर शिक्षक की योग्यता तौलने लगते हैं। किसी दस्तावेज की गलती से अधिक उन्हें स्कूल का मौसम खटकता है..। पढ़ाई की गुणवत्ता पर बात करने के बजाय, वे छोटी-मोटी कमियों पर नुक्स निकाल कर शिक्षकों को छात्रों के सामने फटकारते हैं और अपमानित करते है..। शिक्षकों का कहना है कि यह रवैया उनका मनोबल तोड़ रहा जो शिक्षा के माहौल पर भी नकारात्मक असर डाल रहा है।

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चर्चाओं में सामने आया कि जेडी राकेश पांडे का सिर्फ सख्ती तक सीमित नहीं है। शिक्षकों का आरोप है कि वे निरीक्षण के नाम पर मौखिक नोटिस और निलंबन की धमकियां देकर दबाव बनाते हैं। कई शिक्षकों ने बताया कि नोटिस मिलने के बाद उन्हें संभागीय कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं और मामले को ठंडा करने के लिए कुछ समझौते का संकेत दिया जाता है। शिक्षक संगठन इसे प्रताड़ना का नया तंत्र बता रहे हैं और इसके खिलाफ सभी संगठनों ने एकजुट होकर मोर्चा खोला है.!

बिलासपुर से इस घेराव का समर्थन करने
छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के महासचिव और प्रदेश अध्यक्ष के दावेदार अश्विनी कुर्रे ने बताया कि राकेश पांडे खुद बस्तर की माटी से हैं, मगर वे बस्तरिया का फर्ज भूल चुके है..! उनका कहना है कि शिक्षक अगर जींस पहन ले, तो उन्हें आपत्ति होती है। वह तय करना चाहते हैं कि शिक्षक पढ़ाएगा या झाड़ू लगाएगा। कुर्रे का तर्क है कि अफसर जींस पहन सकते है शिक्षक नहीं ऐसा विषय समाने आ रहा है। जबकि विभागीय नियमों में शिक्षकों के लिए कोई निश्चित ड्रेस कोड नहीं है, केवल शालीनता बरतने की अपेक्षा है। पर यहां तो कपड़ों के नाम पर साहब और मजदूर की मानसिकता थोपने की कोशिश हो रही है।

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छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष मनीष मिश्रा ने बस्तर के शिक्षकों का समर्थन करते हुए कहा कि यह आंदोलन केवल एक अधिकारी के खिलाफ नहीं, बल्कि उस सोच के खिलाफ है जो शिक्षक को सम्मान के बजाय शक की नजर से देखती है। उन्होंने कहा कि बस्तर के शिक्षक कठिन परिस्थितियों में भी जंगल-पहाड़ों के बीच शिक्षा की मशाल जलाए हुए हैं, और अब उन्हें अफसरशाही की चाबुक से नीचा दिखाया जा रहा है। यह बस्तर का अपमान है उनका कहना है कि इज्जत और सम्मान बस्तरिया की पहचान है, कपड़ों की नहीं।

कोंडागांव जिले में जींस पहनने पर एक शिक्षक को नोटिस जारी किए जाने के बाद से यह विवाद पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा विभाग में निरीक्षण का मतलब अब सुधार नहीं, बल्कि डर फैलाना बन गया है। दादागिरी बंद करो, सम्मान दो का नारा अब बस्तर के हर कोने से उठ रहा है..।

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गुरुवार को संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जेडी राकेश पांडे को नहीं हटाया गया, तो दीपावली के बाद स्कूलों में तालाबंदी की जाएगी..। शिक्षकों ने कहा कि उनका आगामी आंदोलन अब केवल एक अधिकारी के खिलाफ नहीं है उस व्यवस्था के खिलाफ होगा जो शिक्षक को सम्मान की नजरिए से नहीं देखता..!

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि राकेश पांडे की मौजूदा पोस्टिंग जगदलपुर के एक प्रभावशाली जनप्रतिनिधि की सिफारिश से हुई थी। बताया जाता है कि सीनियर अफसरों को नजरअंदाज करते हुए पहले रायपुर और फिर उन्हें उनके गृह क्षेत्र बस्तर में पदस्थ किया गया। पिछले रिकॉर्ड कमजोर होने के बावजूद वे राजनीतिक संरक्षण के कारण पद पर टिके हुए हैं।

बस्तर के शिक्षकों का कहना है कि अब संघर्ष केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ है। उनका कहना है कि अगर अपमान की जड़ यहीं से फूटी है, तो उसका उखाड़ना भी यहीं से शुरू होगा..।
यह आंदोलन अब केवल विभागीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि शिक्षकों की अस्मिता और सम्मान का मुद्दा बन गया है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि मामले की जानकारी शासन प्रशासन और स्थानीय सांसद को दी गई है अब इस आक्रोश को सिस्टम समझेगा या फिर यह चिंगारी दीपावली के बाद बड़ा आंदोलन बनकर भड़क उठेगी।