रायपुर । आखिर छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एक ही मंच पर आए और एक महाबहस में हिस्सा लिया । मुद्दा यही था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत छत्तीसगढ़ में बने घरों के आंकड़े क्या कहते हैं..? आंकड़ों को लेकर पिछले कई दिनों से आरोप – प्रत्यारोप का सिलसिला चल  रहा है। दोनों नेताओं ने आमने- सामने बैठकर कैमरों के सामने सीधी बहस की । खुले मंच पर सीधे संवाद का यह नजारा लोगों के बीच काफी चर्चित रहा।

बहस तक कैसे पहुंची बात

यह टकराव अचानक नहीं हुआ। पीएम आवास योजना छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद का बड़ा मुद्दा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार आवासों के निर्माण को लेकर आंकड़ों में अंतर का आरोप लगाते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साध रहे थे। इसी बयानबाज़ी के बीच डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने भूपेश बघेल को सीधी खुली बहस की चुनौती दे डाली, और बहस के लिए जगह चुनी गई — रायपुर प्रेस क्लब। भूपेश बघेल ने भी बिना किसी हिचकिचाहट के इस चुनौती को स्वीकार कर लिया, और 15 सितंबर की तारीख तय हो गई। जैसे ही तय तारीख आई, दोनों नेता रायपुर प्रेस क्लब में आमने-सामने बैठे, और लाइव डिबेट शुरू हो गई, ।

विजय शर्मा का पहला वार: “18 लाख आवास हमारी पहली कैबिनेट में स्वीकृत”

डिबेट की शुरुआत में डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने आक्रामक अंदाज़ में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि “मोर आवास मोर अधिकार” आंदोलन उनकी पार्टी का था, और सरकार बनते ही उनकी पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख पीएम आवास स्वीकृत किए गए। उन्होंने आंकड़े गिनाते हुए कहा कि 25 सितंबर 2023 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पीएम आवास स्वीकृत किए थे, लेकिन उस दौरान सिर्फ सात लाख आवास ही स्वीकृत हो पाए, और उसमें से भी केवल 84 हज़ार लोगों के खाते में पैसा भेजा जा सका। विजय शर्मा का दावा था कि उनकी सरकार अब तक 11.75 लाख से ज़्यादा पीएम आवास पूरे करवा चुकी है, और आगे कहा कि कांग्रेस सरकार ने अपने पूरे पांच साल के कार्यकाल में कुल मिलाकर केवल तीन लाख पीएम आवास ही बनवाए, जबकि छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2025-26 में देश में सबसे ज़्यादा पीएम आवास बनाए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि तत्कालीन पंचायत मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने पीएम आवास न बन पाने के मुद्दे पर ही इस्तीफ़ा दे दिया था।

भूपेश बघेल का पलटवार: “कोरोना काल था, हमें RBI से लोन लेना पड़ा”

भूपेश बघेल ने इन आरोपों का जवाब कोरोना महामारी के दौर का हवाला देकर दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में राज्यों की आर्थिक हालत बेहद खराब थी, यहां तक कि उन्हें कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक से कर्ज़ लेना पड़ा था। उनका कहना था कि उसी दौर में केंद्र सरकार ने पीएम आवास योजना के लिए बना पोर्टल ही बंद कर दिया था, जिसकी वजह से आवास स्वीकृत करने में दिक्कत आई। भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार के 18 लाख आवास स्वीकृति के दावे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अब तक केवल 10 लाख पीएम आवास ही स्वीकृत किए हैं, तो छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा इतना बड़ा कैसे हो सकता है, जबकि सरकार का दावा है कि यह आंकड़ा 46 लाख तक पहुंच चुका है।

आरोप-प्रत्यारोप और तीखी नोकझोंक

बहस जैसे-जैसे आगे बढ़ी, दोनों नेताओं के बीच तल्खी भी बढ़ती गई। विजय शर्मा ने भूपेश बघेल पर सीधा आरोप लगाया कि वे “बरगलाने की कोशिश” कर रहे हैं और आंकड़ों की गलत गिनती पेश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “ग्रोक” जैसे एआई टूल से भी पूछा जाए तो वह सही आंकड़ा बता देगा, और भूपेश बघेल को अपने पूर्व मुख्यमंत्री के पद के अनुरूप बात करनी चाहिए। इस पर भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए कहा कि विजय शर्मा खुद इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं। बहस में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब आंकड़ों को लेकर स्थिति उलझती नज़र आई और भूपेश बघेल ने खुद कहा, “मैं तो गणित का ही छात्र रहा हूं,” जिससे वहां मौजूद लोगों के बीच भी हलचल मच गई।

विजय शर्मा ने यह भी दावा किया कि केंद्र का पोर्टल पीएम आवास के लिए बंद नहीं था, बल्कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार खुद पैसा पोर्टल में डालना नहीं चाहती थी। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में पश्चिम बंगाल, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और केरल जैसे तमाम राज्यों ने आवास योजना का पैसा स्वीकार किया, तो सिर्फ छत्तीसगढ़ की तत्कालीन सरकार ने ही इसे स्वीकार करने से इनकार क्यों किया। इसके जवाब में भूपेश बघेल ने आंकड़ों के ज़रिए अपनी बात रखते हुए कहा कि 2019-20 में उन्हें जो लक्ष्य दिया गया था, उतना ही उन्होंने पूरा भी किया — 1,51,000 का लक्ष्य मिला था और उन्होंने 1,51,098 आवास स्वीकृत किए।

“जनता मुझे सज़ा देगी”: भूपेश बघेल का चौंकाने वाला बयान

बहस के एक बेहद अहम मोड़ पर विजय शर्मा ने भूपेश बघेल से सीधा सवाल किया कि अगर उन्हें जितना लक्ष्य मिला था उतना पूरा किया, तो जो अतिरिक्त आवास केंद्र से मिले थे, उनका क्या हुआ — क्योंकि अगर वे स्वीकार कर लिए जाते, तो गरीबों के घर दस साल पहले ही बन चुके होते। इस तीखे सवाल के जवाब में भूपेश बघेल ने सीधे तौर पर स्वीकार किया कि इसमें कहीं न कहीं चूक हुई, और कहा — “जनता मुझे सज़ा देगी।” यह बयान बहस के सबसे चर्चित पलों में से एक बन गया।

निष्कर्ष: आंकड़ों की इस जंग में जीत किसकी?

करीब दो घंटे तक चली इस लाइव बहस में दोनों नेताओं ने अपने-अपने आंकड़े, तर्क और जवाबी सवाल पेश किए। विजय शर्मा जहां लगातार यह साबित करने में जुटे रहे कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आवास योजना की रफ्तार बेहद धीमी रही, वहीं भूपेश बघेल कोरोना काल की चुनौतियों और केंद्र सरकार की भूमिका को सामने रखते हुए अपनी सरकार का बचाव करते नज़र आए। हालांकि बहस के बीचोबीच भूपेश बघेल का “जनता मुझे सज़ा देगी” वाला बयान इस पूरी बहस का सबसे यादगार और चर्चित पल बन गया। अब सवाल यही है कि आंकड़ों की इस सार्वजनिक जंग से आम जनता के मन में किसकी छवि मज़बूत हुई है — यह फैसला तो आने वाले समय में जनता खुद ही देगी, लेकिन इतना तय है कि इस तरह की खुली और सीधी राजनीतिक बहस छत्तीसगढ़ की सियासत के लिए एक नया और अनोखा अध्याय ज़रूर बन गई है।