बिलासपुर… गांव में समझाइश दिए जाने के बाद भी एक किशोरी को लगातार परेशान करने के मामले में आरोपी को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। किशोरी की आत्महत्या से जुड़े इस मामले में अदालत ने निचली अदालत की दोषसिद्धि और दो साल के सश्रम कारावास की सजा बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी। अदालत ने उसे 30 दिनों के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है, ताकि वह शेष सजा काट सके।

जस्टिस सुधीर कुमार की एकलपीठ ने 15 अक्टूबर 2026 को सुनाए फैसले में कहा कि निचली अदालत का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों के अनुरूप है और उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। आरोपी खिरसाय पिता परसराम रात्रे को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। जुर्माना नहीं चुकाने पर छह महीने के अतिरिक्त सश्रम कारावास का प्रावधान भी बरकरार रखा गया है।

 बैठक के बाद भी नहीं रुकी हरकतें

मामला महासमुंद जिले के बसना थाना क्षेत्र के ग्राम सोनामुंडी का है। अभियोजन के अनुसार, 7 जुलाई 2011 को आरोपी ने करीब 13 वर्षीय किशोरी को बोरिंग के पास परेशान किया और उसके साथ गलत व्यवहार किया था। आरोपी की हरकतों को लेकर पहले गांव में बैठक भी हुई थी। उसे समझाइश देकर ऐसी हरकतें बंद करने के लिए कहा गया, लेकिन इसके बाद भी किशोरी को परेशान किए जाने का सिलसिला नहीं रुका।

घटना वाले दिन किशोरी घर लौटी और अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली। उसे जलता देखकर बच्चों ने शोर मचाया। ग्रामीणों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन किशोरी की जान नहीं बचाई जा सकी। इसके बाद किशोरी के पिता ने ग्रामीणों के साथ थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र पेश किया।

गवाहों के बयान बने अहम आधार

हाईकोर्ट में अपील की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयानों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। प्रत्यक्षदर्शी सिरमोती ने बताया कि घटना के दिन आरोपी ने बोरिंग के पास किशोरी को पकड़ लिया था। उसे देखकर आरोपी खेतों की ओर भाग गया। किशोरी की मां करीमोती ने भी गवाही में कहा कि आरोपी पहले से उसकी बेटी को परेशान करता था और इस संबंध में गांव में बैठक बुलाई गई थी।

एक अन्य गवाह के अनुसार, किशोरी ने मृत्यु से पहले उसे बताया था कि आरोपी द्वारा परेशान किए जाने के कारण उसने खुद को आग लगाई। अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि आरोपी विवाहित था और उसके बच्चे थे। किशोरी की शादी तय होने के बाद आरोपी द्वारा उससे शादी करने की बात कहे जाने का उल्लेख भी साक्ष्यों में हुआ।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किशोरी की मौत का कारण जलने से उत्पन्न सदमा बताया गया था और मृत्यु को आत्महत्या की प्रकृति का माना गया। मामले की सुनवाई के बाद सेशन कोर्ट महासमुंद ने 31 दिसंबर 2011 को आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इसी फैसले को आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

30 दिन में आत्मसमर्पण करना होगा

हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर निचली अदालत के फैसले को सही मानते हुए अपील निरस्त कर दी। अदालत ने आरोपी के जमानत बांड रद्द कर उसे 30 दिनों के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। तय अवधि में आत्मसमर्पण नहीं करने पर ट्रायल कोर्ट को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। राज्य की ओर से पैनल अधिवक्ता डॉ. ऋचा पांडे ने पैरवी की।